राजस्थान के अलवर में शादी के 54 साल बाद एक बुुजुर्ग दंपती के संतान हुई है। महिला की उम्र 70 और पुरुष की उम्र 75 वर्ष है। बुजुर्ग दंपती के संतान इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आइवीएफ) तकनीक के माध्यम से हुई है। चिकित्सकों का दावा है कि देश-दुनिया में पहले भी बुजुर्ग दंपती माता-पिता बन चुके हैं, लेकिन राजस्थान का यह इस तरह का पहला मामला है।
1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय झुंझुनूं जिले के नुहनिया गांव निवासी सैनिक गोपीचंद के पैर में गोली लग गई थी। इससे उनको अपने दैनिक जीवन के कामकाज करने में भी मुश्किल होने लगी। ऐसे में गोपीचंद सेना से सेवानिवृत हो गए और गांव में आकर रहने लगे। उनकी 1968 में शादी हुई थी, मगर कोई संतान नहीं थी। ऐसे में गोपीचंद और उनकी पत्नी चंद्रवती ही घर में रहते थे। उम्र बढ़ने के साथ ही उन्हें संतान की जरूरत का अहसास होने लगा। करीब डेढ़ साल पहले अपने स्वजन के माध्यम से दंपती अलवर के चिकित्सक डा. पंकज गुप्ता के पास पहुंचे। उन्होंने संतान की जरूरत बताई।
डा.पंकज गुप्ता ने उन्हें आइवीएफ तकनीक से संतान पैदा होने के बारे में बताया। दंपती इसके लिए तैयार हो गया। उनका इलाज चालू किया गया। आइवीएफ प्रक्रिया से तीसरे प्रयास में चंद्रवती गर्भवती हुईं। सोमवार को चंद्रवती ने एक बच्चे को जन्म दिया। चंद्रवती और उनका बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। डा.पंकज ने बताया कि बच्चे का वजन पौने तीन किलो है। गोपीचंद और चंद्रवती संतान पाकर खुश हैं। दोनों का कहना है कि हमें जीने का सहारा मिल गया।
आइवीएफ को पहले टेस्ट ट्यृब बेबी के नाम से जाना जाता था। इलाज की इस प्रक्रिया में महिला के अंडों और पुरुष के शुक्राणुओं को मिलाया जाता है। जब भ्रूण तैयार हो जाता है तब उसे महिला के गर्भ में धारण कर दिया है। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। 25 जुलाई, 1978 को पहला टेस्ट ट्यूब बेबी इंग्लैंड में पैदा हुआ था।
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