रायपुर। छत्तीसगढ़ में टीबी उन्मूलन अभियान को गति देने के लिए राज्य स्तरीय ‘जोश टीम’ का शुभारंभ खड़गवां से किया गया। इस पहल के तहत माय भारत के युवा स्वयंसेवकों और राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेटों को टीबी उन्मूलन के प्रयासों से जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम के साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में जिला स्तरीय शुभारंभ भी किया गया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ने टीबी उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। प्रदेश के खड़गवां, सोनहत, बतौली और घरघोड़ा विकासखंडों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पहली बार चार विकासखंडों को यह उपलब्धि मिली है। इसे राज्य के साथ देश में भी टीबी मुक्त विकासखंडों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
# स्वास्थ्य मंत्री ने जनभागीदारी पर दिया जोर
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक वर्ग का सामूहिक दायित्व है। युवाओं की ऊर्जा और जनभागीदारी को अभियान से जोड़कर इसके परिणामों को और बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि टीबी की समय पर जांच, नियमित उपचार और इलाज का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मरीजों के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना भी आवश्यक है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि ‘जोश टीम’ के माध्यम से माय भारत और NCC से जुड़े युवा अपने क्षेत्रों में लोगों को टीबी के लक्षणों, जांच, उपचार और बचाव के बारे में जागरूक करेंगे। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से टीबी उन्मूलन का संदेश गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
# 4,676 टीबी मुक्त पंचायतों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2025 के लिए राज्य की 4,676 टीबी मुक्त पंचायतों को जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि टीबी उन्मूलन के लिए पंचायतों, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
# चार विकासखंडों की उपलब्धि दूसरे क्षेत्रों के लिए प्रेरणा
स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार चार विकासखंडों को टीबी मुक्त घोषित किया जाना राज्य के टीबी उन्मूलन अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सफलता स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्यकर्मियों, मितानिनों, निक्षय मित्रों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि अब इन विकासखंडों में हासिल उपलब्धि को बनाए रखना और अन्य विकासखंडों को भी टीबी मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास करना जरूरी है। इसके लिए संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच की सुविधा, गुणवत्तापूर्ण उपचार और इलाज का पूरा कोर्स सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने टीबी मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने और उन्हें सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
# युवाओं की भागीदारी से गांव-गांव पहुंचेगा जागरूकता संदेश
कार्यक्रम में माय भारत और NCC के जिला अधिकारियों तथा युवा स्वयंसेवकों से टीबी उन्मूलन के संदेश को समुदाय तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। युवाओं के माध्यम से लोगों को टीबी के लक्षण पहचानने, समय पर जांच कराने और नियमित रूप से उपचार पूरा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इस दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों और युवाओं ने टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को मजबूत करने की बात कही। ‘जोश टीम’ के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाकर प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के प्रयासों को निरंतर गति देने पर जोर दिया गया।










