रायपुर, 13 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उच्च शिक्षा विभाग की 1306 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य के सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक विकास की आधारशिला होती है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है।
मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल 37 योजनाएं संचालित की जा रही हैं। यह बजट प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार, गुणवत्ता सुधार और अधोसंरचना विकास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
# वंचित क्षेत्रों के लिए बजट में वृद्धि
सरकार ने अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए वित्तीय प्रावधान बढ़ाया है। वर्ष 2025-26 में जहां 230.36 करोड़ रुपये का प्रावधान था, उसे बढ़ाकर 2026-27 में 249.61 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसी तरह अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के लिए 103.10 करोड़ रुपये की राशि बढ़ाकर 120.23 करोड़ रुपये कर दी गई है।
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य के तहत सरकार ने GYAN यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को विकास का प्रमुख आधार बनाया है। राज्य में महाविद्यालयों की संख्या 2024-25 में 335 थी, जो 2025-26 में बढ़कर 343 हो गई है। इसी अवधि में आठ नए स्नातक महाविद्यालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें संगीत, विधि और शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय भी शामिल हैं।
# दूरस्थ क्षेत्रों में नए कॉलेज और नए विषय
दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की सुविधा बढ़ाने के लिए जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के खड़गवा में बीएड (आईटीईपी) पाठ्यक्रम तथा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सुहेला में नए महाविद्यालय की स्थापना के लिए 1.30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में नए विषय शुरू करने और रामचंद्रपुर तथा घरघोड़ा महाविद्यालय को स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उन्नत करने के लिए 1.40 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
# 25 महाविद्यालयों के नए भवन बनेंगे
वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 25 महाविद्यालयों के लिए नए भवन निर्माण का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही छह महाविद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए 4.05 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
# ऑडिटोरियम और छात्रावास निर्माण
कोहका-नेवरा-तिल्दा में ऑडिटोरियम निर्माण, भानुप्रतापपुर में छात्रावास निर्माण तथा धमतरी महाविद्यालय के छात्रावास में बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए कुल 1.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे दूरदराज के विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलने की उम्मीद है।
# 36 महाविद्यालय बनेंगे उत्कृष्टता केंद्र
राज्य सरकार ने चयनित महाविद्यालयों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। इसके तहत 36 शासकीय महाविद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। वर्ष 2025-26 में 25 महाविद्यालयों और 2026-27 में पांच महाविद्यालयों के लिए प्रति महाविद्यालय तीन करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
# NAAC मूल्यांकन और गुणवत्ता पर जोर
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। अब तक 200 शासकीय महाविद्यालयों और पांच राज्य विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन National Assessment and Accreditation Council द्वारा कराया जा चुका है।
# नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन
राज्य के 335 शासकीय और 321 अशासकीय महाविद्यालयों, आठ राजकीय विश्वविद्यालयों तथा 18 निजी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। इसके तहत बहुविषयक शिक्षा, मल्टी एंट्री और मल्टी एग्जिट प्रणाली तथा कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में 42 स्किल एन्हांसमेंट कोर्स और 108 जनरिक इलेक्टिव तथा एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स विकसित किए गए हैं।
# PM-USHA योजना से उच्च शिक्षा को मजबूती
प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान PM-USHA के तहत 12 शासकीय महाविद्यालयों को प्रति महाविद्यालय पांच करोड़ रुपये की सहायता दी गई है, जबकि तीन विश्वविद्यालयों को प्रति विश्वविद्यालय 20 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय को MERU योजना के तहत 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है।
इसके अलावा लैंगिक समावेशन और समानता पहल के तहत राजनांदगांव, सरगुजा, धमतरी, बलौदाबाजार और कबीरधाम जिलों को महिला शिक्षा और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के लिए प्रति जिला 10 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, समतामूलक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो और राज्य के समग्र विकास को गति मिल सके।










