रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस-भाजपा के बीच सियासी बहस तीखी होती जा रही है। कांग्रेस ने आरएसएस और भाजपा को आजादी की लड़ाई में घसीट लिया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पूछा है, भाजपा-आरएसएस के पितृ पुरुष विनायक दामोदर सावरकर आजाद हिंद फौज के खिलाफ हिंदुओं को अंग्रेजी सेना में भर्ती होने का आह्वान क्यों कर रहे थे। कांग्रेस नेता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक को बहस की चुनौती दी है। एक दिन पहले धरमलाल कौशिक ने एओ ह्यूम द्वारा कांग्रेस की स्थापना को अंग्रेजों के लिए काम करने से जोड़ा था। शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पूछा, अगर भाजपा और उसकी मातृ संस्था आरएसएस के संस्थापक खांटी भारतीय रहें हैं तो आजाद हिंद फौज के खिलाफ अंग्रेजी सेना में भर्ती कराने और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और क्रांतिकारियों की मुखबिरी के काम में आरएसएस के लोग क्यों शामिल रहे? उन्होंने पूछा, आरएसएस के नेता मुसोलिनी से मिलने और मुसोलिनी की विचारधारा को समझने के लिए इटली क्यों गए थे? आरएसएस ने हिटलर की नाजी पार्टी की ड्रेस और अभिवादन का तरीका क्यों अख्तियार किया?
भाजपा और आरएसएस की विचारधारा वाले नेताओं ने आजादी की लड़ाई में भाग क्यों नहीं लिया
शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पूछा, वर्ष 1947 तक सावरकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय जैसे भाजपा और आरएसएस की विचारधारा वाले नेता आजादी की लड़ाई में भाग क्यों नहीं लिया? उन्होंने पूछा, सावरकर अंग्रेजों से बार-बार माफी मांगने का कारण क्या था। माफी मांग कर काला पानी से छूटने के बाद सावरकर को अंग्रेजी सरकार एक कलेक्टर की तनख्वाह से ज्यादा पेंशन क्यों देती रही? शैलेश ने पूछा, स्वदेशी और राष्ट्रवादी विचारधारा का दावा करने वाले लोग बताएं कि आजादी की लड़ाई में उनका राष्ट्रवाद कहां था? अंग्रेजों की फूट डालो नीति में संघ विचारधारा के लोग मुस्लिम लीग की तरह वे सहयोगी क्यों बने रहे?
–तंज भी कसा- हमारा कोई अध्यक्ष दलाली लेते नहीं पकड़ा गया
कांग्रेस के शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा, कांग्रेस ने आजादी की लड़ाई लड़ी। महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, महामना मालवीय, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल ना जाने कितने कांग्रेस नेताओं के जीवन का अधिकांश हिस्सा जेलों में बीता। यह इतिहास में दर्ज है। उन्होंने कहा, कांग्रेस को गर्व है कि उनके अध्यक्षों में से कोई रक्षा सौदों के बदले घूस लेते नहीं पकड़ा गया और न ही कोई तड़ीपार हुआ।










