नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में गुरुवार को भाजपा मुख्यालय, नई दिल्ली में भाजपा शासित राज्यों के जल शक्ति मंत्रियों के लिए दो दिवसीय ‘जल मंथन’ कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन भाजपा के सुशासन एवं पॉलिसी रिसर्च विभाग की ओर से किया गया। इसमें जल संसाधनों, प्रभावी मंत्री-व्यवस्था और संगठन-सरकार के बीच बेहतर समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।
कार्यशाला का उद्देश्य भाजपा शासित राज्यों में जल शक्ति विभागों की कार्यक्षमता बढ़ाना, मंत्रियों को बेहतर प्रशासनिक परिणाम हासिल करने के लिए आवश्यक रणनीतियों से अवगत कराना और सुशासन की व्यवस्था को और मजबूत करना है। कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न राज्यों में जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के अनुभवों को साझा करने पर भी जोर दिया गया।
भाजपा के अनुसार, पार्टी की ओर से समय-समय पर अपनी सरकारों के कामकाज को बेहतर बनाने और उन्हें अधिक प्रभावी परिणाम हासिल करने में सहयोग देने के लिए इस तरह की कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इसी उद्देश्य के तहत सभी भाजपा शासित राज्यों के जल शक्ति मंत्रियों के लिए ‘जल मंथन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
भारत सरकार की ओर से राज्यों के जल शक्ति मंत्रियों के सम्मेलन के बाद भाजपा स्तर पर यह दो दिवसीय बैठक और कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत बुधवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के संबोधन से हुई। इस दौरान उन्होंने सभी मंत्रियों से संवाद करते हुए शासन, संगठन और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।
गुरुवार को भाजपा केंद्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में भाजपा शासित 14 राज्यों के 25 जल शक्ति मंत्रियों ने हिस्सा लिया। जल शक्ति से जुड़े विभागों में सिंचाई, ग्रामीण पेयजल, पेयजल एवं स्वच्छता तथा पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग से संबंधित जिम्मेदारियां शामिल हो सकती हैं। इन्हीं विभागों का दायित्व संभाल रहे मंत्रियों को कार्यशाला में आमंत्रित किया गया।
कार्यशाला के पहले सत्र में ‘इफेक्टिव मिनिस्टीरियल एस्टैब्लिशमेंट’ यानी मंत्री के विभागीय तंत्र को प्रभावी तरीके से संचालित करने के विषय पर चर्चा हुई। इसमें विभागीय कामकाज को अधिक व्यवस्थित, परिणाम-केंद्रित और प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
इसके बाद ‘व्हाट इज द इंडिया वॉटर स्टोरी’ विषय पर विशेषज्ञों ने भारत में जल संसाधनों की मौजूदा स्थिति और व्यापक परिदृश्य पर मार्गदर्शन दिया। देश में जल उपलब्धता, जल प्रबंधन और भविष्य की चुनौतियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
कार्यशाला में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल को लेकर भी एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें संगठनात्मक तंत्र और सरकारी व्यवस्था के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने, योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और जनता तक सरकारी योजनाओं का अधिक प्रभावी लाभ पहुंचाने से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए गए।
‘जल मंथन’ कार्यशाला को भाजपा शासित राज्यों में जल प्रबंधन और सुशासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान जल संसाधनों से जुड़े अनुभवों, प्रशासनिक चुनौतियों और बेहतर कार्यप्रणाली पर व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है।










