केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) केरूप में नियुक्त किया है। लेफ्टिनेंट जनरल चौहान सैन्य मामलों के विभाग केसचिव केरूप में भी कार्य करेंगे। एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल चौहान केपूर्वी कमान के जनरल अफसर कमांडिंग इन चीफ रहने केदौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद में कमी आई। इससे कई पूर्वोत्तर राज्यों में सेना की तैनाती में भी कमी की जा सकी।
लेफ्टिनेंट जनरल चौहान 1981 से 2021 तक सेना में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वह 40 साल की शानदार सेवा केबाद सेना की पूर्वी कमान केप्रमुख (जनरल अफसर कमांडिंग इन चीफ) केपद से 31 मई 2021 को सेवानिवृत हुए थे। पूर्वी कमान ने उनके नेतृत्व में भारत-चीन सीमा पर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में अपना साहस दिखाया।
लेफ्टिनेंट जनरल चौहान मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। उनको उत्तम युद्ध सेवा मेडल, परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। जनरल बिपिन रावत के निधन केबाद से यह पद खाली था। जलरल रावत का निधन तमिलनाडु के कुन्न्ूर में 1 दिसंबर 2021 को एक हेलीकाप्टर क्रैश में हो गया था। जनरल रावत देश के पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ थे। इस हेलीकाप्टर हादसे में जनरल बिपिन रावत की पत्नी मधुलिका रावत समेत सेना के 14 कर्मियों की मौत हो गई थी।
पूर्वी कमान की जिम्मेदारी संभालने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल चौहान नई दिल्ली में सैन्य अभियान के महानिदेशक (डीजीएमओ) के तौर पर नियुक्त रहे। बतौर डीजीएमओ उन्होंने ‘आपरेशन सनराइज में मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी। इस आपरेशन में भारतीय सेना ने म्यांमार की फौज के साथ मिलकर सीमाओं के पास उग्रवादियों के खिलाफ उक्त आपरेशन चलाया था। सेना केटॉप कमांडरों में शुमार लेफ्टिनेंट जनरल चौहान पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट में अंजाम दी गई सर्जिकल स्ट्राइक की योजना से भी जुड़े थे।










