मोदी सरकार ने जीएसटी चोरी पर लगाम के लिए बड़ा कदम उठाते हुए जीएसटी अफसरों को रजिस्ट्रेशन के निलंबन का अधिकार दिया गया है। अब कारोबारी के सेल्स रिटर्न यानी जीएसटार-1 फॉर्म और उसके सप्लायर द्वारा भरे गए रिटर्न में बड़ा अंतर मिला तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन तत्काल निलंबित कर दिया जाएगा।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) ने इस संबंध में मानक परिचालन प्रक्रिया यानी एसओपी जारी की है। इसमें कहा गया है कि ऐसे किसी भी मामले में करदाता का रजिस्ट्रेशन निलंबित किया जाएगा और उसे इस बारे में सिस्टम जनरेटेड सूचना मिल जाएगी। साथ ही निलंबन का कारण बताते हुए रजिस्ट्रेशन रद करने का नोटिस भी उसे ईमेल पर भेजा जाएगा।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी करदाता की ओर से जीएसटीआर-1 में दी गई बिक्री की जानकारी या खरीद की जानकारी उसके आपूर्तिकर्ता के जीएसटीआर-1 फॉर्म से बहुत ज्यादा अलग पाई गई, तो रजिस्ट्रेशन निलंबित हो जाएगा। इस तरह की अनियमितता को जीएसटी कानून के प्रविधानों का उल्लंघन माना गया है।
रजिस्ट्रेशन निलंबित होने के बाद नोटिस जारी होने के 30 दिन के भीतर संबंधित करदाता को जवाब देना होगा। इसमें उसे स्पष्ट करना होगा कि फॉर्म में अनियमितता के कारण उसका रजिस्ट्रेशन रद क्यों न किया जाए। यह जवाब भी कॉमन पोर्टल के माध्यम से भेजना होगा। जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। रिटर्न न भरने के कारण रजिस्ट्रेशन निलंबित होने और रद किए जाने का नोटिस मिलने पर सभी बकाया रिटर्न भरते हुए जवाब देने का विकल्प मिलेगा।










