अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ओरियन अंतरिक्ष यान ने पहली बार चंद्रमा की सतह के 130 किलोमीटर के दायरे में परिक्रमा पूरी की।
नासा के अनुसार, आर्टेमिस-1 मिशन के तहत ओरियन ने छठे दिन दूर स्थित प्रतिकूल कक्षा में प्रवेश के लिए जरूरी सहायक इंजन का इस्तेमाल करते हुए पहले मैनोवर (कलाबाजी) के साथ चौथे कक्षीय प्रक्षेप पथ को पूरा किया। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने जारी बयान में बताया कि ओरियन अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के सबसे करीब से परिक्रमा (फ्लाईबाई) 21 नवंबर को पूरी की।
आर्टेमिस-1 मिशन के प्रबंधक माइस सराफिन के अनुसार, “हमने जैसी योजना की थी, मिशन उसी तरह आगे बढ़ रहा है। प्रणालियां, परिचालन टीम व ओरियन अंतरिक्ष यान अपेक्षा से बेहतर काम कर रहे हैं। हमें इस गहरे अंतरिक्ष में यात्रा करने वाले यान से नई जानकारियां हासिल हो रही हैं।” ओरियनदूसरे मैनोवर के साथ चंद्रामा से दूर स्थित प्रतिकूल कक्ष में प्रवेश करेगा, जिसे डिस्टेंट रेट्रोग्रेड आर्बिट इंसर्शन बर्न कहा जाता है। यह एक उच्च स्थिर कक्ष है, जहां टिके रहने के लिए बहुत कम ईंधन की जरूरत होती है। इसमें पृथ्वी से बाहर के वातावरण में रहने की ओरियन की क्षमता का भी परीक्षण होगा।
अपोलो-13 के रिकार्ड को पार करते हुए ओरियन 25 नवंबर को चंद्रमा से सबसे दूर बिदु पर लगभग 92,194 किलोमीटर की यात्रा करेगा। आर्टेमिस-1 नासा के स्पेस लांच सिस्टम (एसएलएस) का पहला एकीकृत फ्लाइट टेस्ट है, जिसके जरिय मानवरहित अंतरिक्ष यान ओरियन को अंतरिक्ष में भेजा गया है। वर्ष 1972 में अपोलो मिशन की समाप्ति के बाद नासा ने पहली बार वर्ष 2025 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की योजना की है।










