रायपुर, 21 मई 2025: छत्तीसगढ़ में विद्यालयों के युक्तियुक्तकरण को लेकर फैली भ्रांतियों और अफवाहों पर शिक्षा विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विभाग ने कहा है कि इस प्रक्रिया के तहत न तो किसी विद्यालय को बंद किया जा रहा है और न ही किसी शिक्षक का पद समाप्त किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की न्यायसंगत उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
5000 व्याख्याताओं के अतिशेष होने का दावा भ्रामक
कुछ संगठनों द्वारा किए गए इस दावे को कि 5000 व्याख्याता अतिशेष हो चुके हैं, शिक्षा विभाग ने तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया है। विभाग ने बताया कि हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में विषय आधारित पद स्वीकृत होते हैं।यदि किसी विद्यालय में किसी विषय का एकमात्र व्याख्याता कार्यरत है, तो उसे अतिशेष नहीं माना जाएगा।
विद्यालयों के समायोजन का मतलब बंद होना नहीं
4 हजार विद्यालयों के बंद होने की बात को पूरी तरह बेबुनियाद बताया गया है। विभाग ने कहा कि NEP 2020 के क्लस्टर स्कूल कॉन्सेप्ट के अनुसार केवल एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों का प्रशासनिक समायोजन किया जा रहा है, जिससे कोई स्कूल बंद नहीं होगा और किसी प्रधानपाठक का पद नहीं हटेगा।
43849 पद खत्म होने का दावा तथ्यहीन
शिक्षकों के 43849 पद खत्म होने के दावे को भी विभाग ने गलत बताया है। विभाग के मुताबिक, आंकड़ों के अनुसार केवल 5370 शिक्षक (3608 प्राथमिक, 1762 पूर्व माध्यमिक) ही दर्ज संख्या के अनुपात में अतिशेष पाए गए हैं। इन्हें केवल अन्य जरूरतमंद विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा, न कि उनके पद समाप्त किए जाएंगे।
गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने की दिशा में कदम
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि युक्तियुक्तकरण एक प्रशासनिक प्रक्रिया भर नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जरूरत वाले विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित कर गुणवत्तापूर्ण और न्यायसंगत शिक्षा प्रणाली का निर्माण करना है।
निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण का निर्णय शिक्षा की बुनियाद को मजबूत करने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और छात्रों को प्रभावी शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है।
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