हमेशा देखने में याद आया घर के बुजुर्गों द्वारा दी गई की सीख हमें कई बार बड़ी बुरी लगती है लेकिन वह बात हमें दोबारा तब जरूर याद आती है जब हम उसे नहीं मानते और उसका विपरीत परिणाम हमारे सामने आता है।
बुजुर्ग एक उसी वट वृक्ष के समान है जिस की कितनी शाखाएं निकल जाए लेकिन उसका जड़ दिन-ब-दिन और मजबूत होते जाती है उसकी मजबूती उसके अनुभव का एहसास दिलाती है इसलिए उन बुजुर्गों की बात मानना उस परीक्षा देने से ज्यादा बेहतर होगा जिसके लिए हमारे बड़े हम को रोका करते थे।










