रायपुर। सतनामी समाज की लंबे समय से चली आ रही गुरु परंपरा को लेकर पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया ने हाल ही में सवाल खड़े किए हैं। डहरिया ने सतनामी समाज से गुरु परंपरा को समाप्त करने की बात की है। इस पर समाज के प्रमुख गुरु रुद्र कुमार और खुशवंत साहेब ने कड़ा विरोध जताया है।
डहरिया ने अपने बयान में कहा कि सतनामी समाज में गुरु परंपरा को समाप्त कर देना चाहिए। उनका दावा है कि समाज के 80 प्रतिशत लोग भी इसी बात से सहमत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाबा गुरु घासीदास के वंश में जन्म लेने से कोई व्यक्ति गुरु नहीं बन जाता। डहरिया के अनुसार, बाबा गुरु घासीदास ही एकमात्र गुरु हैं जिनकी सभी लोग आस्था करते हैं, और इसलिए अधिकतर शिक्षित लोग गुरु परंपरा को समाप्त करने के पक्ष में हैं।
इस बयान के जवाब में, खुशवंत साहेब ने डहरिया की आलोचना की और कहा कि डहरिया मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डहरिया अवसरवादी हैं, जो सत्ता बदलते ही अपने राजनीतिक रुख बदल लेते हैं। खुशवंत साहेब ने यह भी स्पष्ट किया कि सतनामी समाज को यह अच्छी तरह पता है कि कौन गुरु है और कौन नहीं, और डहरिया के बयान से कोई फर्क नहीं पड़ता।
पूर्व मंत्री गुरु रुद्र कुमार ने भी डहरिया की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें गुरु परंपरा की सही समझ नहीं है। उन्होंने बताया कि गुरु परंपरा केवल सतनामी समाज की ही नहीं, बल्कि अन्य समाजों में भी विद्यमान है। गुरुओं ने बाबा जी के संदेशों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।










