तस्करों ने ड्रग्स का बनाया नया कोड रिया

अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती का नाम ड्रग्‍स मामले में आने के बाद तस्‍करों ने ड्रग्‍स का कोड नेम ही रिया रख दिया। नारकोटिक्स विंग ने तस्करों के इस नए कोडवर्ड डी- कोड किए हैं। मुंबई पुलिस के लिए भले ही रिया चक्रवर्ती एक फिल्म अभिनेत्री हैं,  मगर इंदौर में रिया का मतलब एमडीएमए (मिथाइलीन डाइऑक्सी मेथैमफेटामाइन) ड्रग है। इस नशीले पदार्थ को यहां म्याऊं-म्याऊं भी कहा जाता है। इसका सेवन करने वाले लोग पेडलर को रिया के नाम से ऑर्डर देते हैं।
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्‍ध मौत के बाद नारकोटिक्स विंग ने रिया यानी एमडीएमए ड्रग के अलावा गांजा, चरस, अफीम जैसे अन्य मादक पदार्थों के नामों को डी-कोड किया है। सूत्रों बताते हैं कि तस्कर ब्राउन शुगर को चाकलेट, चरस को हरा और अफीम को काला के नाम से बेच रहे हैं। ब्राउन शुगर गहरे भूरे रंग की होती है,  इसलिए चॉकलेट नाम दिया है। गांजा को घास-फूस, पुड़िया, माल और टिकट व नग के नाम से भी मांगा जाता है। रिया (एमडीएमए) की ज्यादातर खपत पबों और फॉर्म हाउसों पर होने लगी है, जबकि घासफूस (गांजा) ढाबों और चाय की छोटी दुकानों पर आसानी से उपलब्ध है।
नारकोटिक्स विंग ने तस्करों के रूट को भी चिह्नित किया है। इसके मुताबिक अफीम मध्य प्रदेश के मंदसौर,  नीमच व राजस्थान के प्रतापगढ़,  भवानी मंडी क्षेत्र से आती है। गांजा ओडिशा से आता है। मध्य प्रदेश के सेंधवा,  सोनकच्छ,  खरगोन,  खड़गवानी और बालसमुंद भी गढ़ बन गए हैं।

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