बलौदाबाजार जिला अस्पताल में स्थित एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बोर्न केअर यूनिट) यानी विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई, निरंतर गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान कर रही है। इस यूनिट के माध्यम से नवजात शिशुओं को स्थानीय स्तर पर ही देखभाल मिल रही है, जिससे बाहर रेफरल कम हुए हैं और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बलौदाबाजार ने बताया कि नवजात शिशुओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में समयपूर्व प्रसव, प्रसव के दौरान दम घुटना, नवजात का संक्रमित होना और जन्मजात विकृतियां शामिल हैं। इसके अलावा, कम उम्र में शादी, एएनसी जांच में अनदेखी, सही पोषण का अभाव जैसे कारण भी शिशु मृत्यु का कारण बन सकते हैं। एसएनसीयू इन परिस्थितियों में शिशुओं की देखभाल के लिए कार्यरत है।
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन ने एसएनसीयू के बारे में जानकारी दी कि यहां नवजात शिशु से लेकर 28 दिन तक के बच्चों को भर्ती किया जाता है। एसएनसीयू में 6 वेंटिलेटर, 12 वार्मर, 27 मल्टी पैरा मॉनिटर, 02 सी पैप और 06 फोटोथेरेपी मशीनें उपलब्ध हैं। बच्चे की देखभाल के लिए 24 घंटे शिशु रोग विशेषज्ञ और नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध रहते हैं। दवाई और उपचार नि:शुल्क हैं। साथ ही माताओं के रहने, नाश्ते और भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। एसएनसीयू की स्थापना के बाद से शिशुओं के रेफरल में काफी कमी आई है और अधिकतर मामलों का उपचार यहीं हो जाता है। जैसे मई में कुल 53 भर्ती बच्चों में से केवल 3 को ही रेफर करना पड़ा। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के निरीक्षण के लिए आई टीम भी एसएनसीयू की व्यवस्था से प्रभावित रही और सेवाओं की सराहना की।
ग्राम दतरेंगी के पीलाराज दास के शिशु को कम वजन (1 किग्रा) के कारण 40 दिनों तक एसएनसीयू में रखा गया, जिससे बाद में उसका वजन 1.3 किग्रा हो गया। भाटापारा के एक मामले में जुड़वां बच्चों की भी इसी केंद्र में भर्ती कर जान बचाई गई। शिशुओं में रेटिनोपैथी की जांच के लिए रायपुर के निजी अस्पताल से डॉक्टर प्रति सप्ताह आते हैं। एसएनसीयू शुरू होने से अब तक करीब 12 सौ शिशुओं का सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है।
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