उत्तर प्रदेश के अमरोहा में फर्जीवाड़ा गिरोह के सदस्यों ने गंगा नदी को ही बेच दिया। सौ बीघा गंगा का सौदा 20 लाख 50 हजार रुपये में कर दिया और 20 लाख रुपये का भुगतान भी ले लिया। बैनामे की बारी आई तो खरीदार को कुछ शक हुआ। खसरा नंबर की जांच कराई तो वह गंगा नदी का निकला। खरीदार ने भुगतान वापस मांगा तो धमकी दी। पांच लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पीड़ित प्रशांत चौधरी का कहना है कि आरोपित और उसके साथियों ने हमें 100 बीघा दूसरी जमीन दिखाई थी। जबकि जिस गाटा संख्या व खसरा नंबर की जमीन का इकरारनामा कराया था वह गंगा नदी का निकला।
2019 में अमरोहा के प्रशांत चौधरी की मुलाकात बिजनौर निवासी कुलवीर सिंह से हुई थी। दोनों के बीच 100 बीघा जमीन खरीदने-बेचना तय हुआ। कुलवीर ने अपनी जमीन अमरोहा में गंगा किनारे गांव रसूलपुर भांवर में बताई थी। उसने प्रशांत को एक गाटा संख्या की 100 बीघा जमीन दिखाई। उसका सौदा 20 लाख 50 हजार रुपये में कर लिया। जमीन का इकरारनामा कराने में कुलवीर के साथ निक्की, कलविद्र सिंह, बिजनौर निवासी काले सिंह और महेंद्र सिंह भी शामिल थे।
इकरारनामे के दौरान प्रशांत ने आरोपितों को छह लाख रुपये आनलाइन दिए और 14 लाख का नकद भुगतान किया। 50 हजार रुपये बैनामे पर देने की बात तय हुई थी। बैनामे की तारीख 20 अगस्त, 2020 तय कर दी गई, लेकिन आरोपित बैनामा के बजाय बहाना बनाते रहे। शक होने पर जब प्रशांत ने जमीन का नंबर तहसील में देखा तो वह गंगा नदी का था। ठगी का पता चलने पर उन्होंने आरोपितों से रुपये मांगे तो आरोपितों ने इन्कार कर दिया। जान से मारने की धमकी दी। डीआईजी शलभ माथुर के आदेश पर पुलिस ने कुलवीर सिंह, महेंद्र सिंह, कुलविद्र सिंह व निक्की के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली है।










