विशेष: महात्मा गांधी का जीवन हमारे लिए आदर्श

महात्मा गांधी के विचार और सिद्धांत आज भी हमारे बीच हैं, बल्कि बीच में ही नहीं हम हर पल उनके विचारों के साथ जी रहे हैं। आगे बढ़ रहे हैं। आज के आधुनिक युग में जरूरी है कि हम शॉर्टकट न अपना कर गांधीवाद को थामे रहें।

महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, आत्मनिर्भरता, सरल जीवन, आत्म अनुशासन, परधर्म सहिष्णुता समेत अन्य नैतिक मूल्यों की वकालत की। इन मूल्यों को खुद आत्मसात कर जीवन बिताया, उनका जीवन हमारे लिए आदर्श है। आप भी इन्हें अपना कर गांधी जी को सदा के लिए जीवित रख सकते हो।

सत्य

गांधी जी सत्य के बड़े आग्रही थे, वे सत्य को ईश्वर मानते थे। एक बार वायसराय लार्ड कर्जेन ने कहा था कि सत्य की कल्पना भारत में यूरोप से आई है। इस पर गांधी जी बड़े ही क्षुब्ध हुए और उन्होंने वायसराय को लिखा, “आपका विचार गलत है। भारत में सत्य की प्रतिष्ठा बहुत प्राचीन काल से चली आ रही है। सत्य परमात्मा का रूप माना जाता है।”

“सत्य मेरे लिए सर्वोपरी सिद्धांत है। मैं वचन और चिंतन में सत्य की स्थापना करने का प्रयत्न करता हूँ। परम सत्य तो परमात्मा हैं। परमात्मा कई रूपों में संसार में प्रकट हुए हैं। मैं उसे देखकर आश्चर्यचकित और अवाक हो जाता हूँ। मैं सत्य के रूप में परमात्मा की पूजा करता हूँ। सत्य की खोज में अपने प्रिय वस्तु की बली चढ़ा सकता हूँ।”

अहिंसा

अहिंसा पर गांधी जी ने बड़ा सूक्ष्म विचार किया है। वे लिखते हैं, “अहिंसा की परिभाषा बड़ी कठिन है। अमुक काम हिंसा है या अहिंसा यह सवाल मेरे मन में कई बार उठा है। मैं समझता हूँ कि मन, वचन और शरीर से किसी को भी दुःख न पहुंचाना अहिंसा है। लेकिन इस पर अमल करना, देहधारी के लिए असंभव है।

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साँस लेने में अनेकों सूक्ष्म जीवों की हत्या हो जाती है। आँख की पलक उठाने, गिराने से ही पलकों पर बैठे जीव मर जाते हैं। सांप। बिच्छु को भी न मारें, पर उन्हें पकडकर दूर तो फेंकना ही पड़ता है। इससे भी उन्हें थोड़ी बहुत पीड़ा तो होती ही है।

ब्रम्हचर्य

जो मन, वचन और काया से इन्द्रियों को अपने वश में रखता है, वही ब्रम्हचारी है। जिसके मन के विकार नष्ट नहीं हुए हैं उसे पूरा ब्रम्हचारी नहीं कहा जा सकता। मन, वचन से भी विकारी भाव नहीं जागृत होने चाहिए। ब्रम्हचर्य की साधना करने वालों को खान-पान का संयम रखना चाहिए। उन्हें जीभ का स्वाद छोडना चाहिए और बनवट तथा श्रृंगार से दूर रहना चाहिए। संयमी लोगों के लिए ब्रम्हचर्य आसान है।

चोरी न करना

यह पांच व्रतों में से एक है। दूसरे की चीज उसके इजाजत के बिना लेना चोरी है। चोरी से कभी कोई अमीर नही बना। जो और जितना आपका है वही सत्य है।

स्वच्छता को प्राथमिकता दें

व्यक्तिगत जीवन में हमें स्वच्छता को प्राथमिकता देनी चाहिए। हमारे घर तथा आसपास के माहौल को साफ-सुथरा रखना चाहिए। स्वच्छता के कार्य को हीन समझने की सोच बदलनी चाहिए। खुद को इन कार्यों को करना चाहिए। गांधीजी के अहिंसा तथा सहिष्णुता के गुण को आत्मसात करने पर समाज में होने वाले अपराध कम होंगे। इससे गांधी के आदर्श समाज का सपना साकार होगा।

भारत धर्मनिरपेक्ष देश

अतिरिक्त एवं सत्र न्यायालय के पंचम न्यायाधीश गंगाधर केएन ने कहा कि आजादी के बाद विविधता में एकता तथा धर्म निरपेक्षता के सिध्दांतों को अपना कर भारत सहित विश्व के अनेक देश अचंभित हो ऐसा विकास किया है। महात्मा गांधी भारत को धर्मनिरपेक्ष देश बनाना चाहते थे। आजाद भारत इसी सोच के आधार पर विकसित हुआ है। धार्मिक सहिष्णुता तथा एकजुटता में विश्वास रखकर भारत ने पड़ोसी देश पाकिस्तान से अधिक विकास किया है।

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ग्रामीण जनता का जीवन स्वावलंबी बने

हर एक को गांधीजी के जीवन के बारे में पढ़ कर समझना चाहिए। पूर्वाग्रहपीडि़त विचारों से महात्मा गांधी के विचारों को तोड़-मरोडऩे वाले मूर्ख तथा दुष्ट व्यक्तियों से अंतर बनाए रखना चाहिए। महात्मा गांधी ग्रामीण जनता का जीवन स्वावलंबी बनाना चाहते थे। ऐसे गांवों के निर्माण के लिए हम सबको आगे आना चाहिए।

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