Google Analytics Meta Pixel अस्पताल में भर्ती बच्चों का दर्द व तनाव कम कर देती हैं कहानियां - Ekhabri.com

अस्पताल में भर्ती बच्चों का दर्द व तनाव कम कर देती हैं कहानियां

बच्चों को जब अस्पताल में भर्ती करना पड़े और उनको कड़वी दवाओं और इंजेक्शन लगने लगे वे इससे दूर भागने वाले हैं। इस दौरान उनकी शारीरिक और मानसिक स्थित का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई बार तो बच्चे इतने डर जाते हैं कि उन्हें स्वस्थ होने में ज्यादा समय लग जाता है। इन्‍हीं विषयों पर अमेरिका स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की पत्रिका प्रोसिडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में एक लेख प्रकाशित कर दावा किया है कि कहानी सुनाने से इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) में भर्ती बच्चों को शारीरिक और भावनात्मक लाभ होता है।

ब्राजील में हुए इस अध्ययन में फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ एबीसी (यूएफएबीसी) के विज्ञानी गुइलहर्म ब्रॉकिंगटन और डीओर इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एजुकेश्ान (आइडीओआर) के जॉर्ज मोल की टीम शामिल रही। इस अध्‍ययन में दो से सात साल के 81 बच्चों को शामिल किया गया। इन्हें अस्थमा,  ब्रोंकाइटिस और न्यूमोनिया जैसी बीमारियां थीं। उन्हें ब्राजील के साओ पाउलो स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 41 बच्चों को उस समूह में रखा गया,  जिन्हें कहानियां सुनाई गईं। 40 बच्चों को उस समूह में जिन्हें कहानियां नहीं सुनाई गईं। कहानी सुनाए जाने से पहले और बाद में बच्चों की स्लाइवा (लार) के नमूने लिए गए, ताकि तनाव व संवेदना से जुड़े हार्मोन क्रमश: कोर्टिंसोल व ऑक्सीटोसिन का विश्लेषण किया जा सके। इसके अलावा बच्चों को अस्पताल,  डॉक्टर,  नर्स,  मेडिसिन,  मरीज,  दर्द और किताब आदि से जुड़े सात कार्ड दिए गए थे,  जिस पर उन्हें अपनी प्रतिक्रियाएं देनी थीं।

वैसे तो दोनों समूहों के बच्चों पर इलाज के दौरान सकारात्मक प्रभाव देखा गया, लेकिन जिस समूह को कहानियां सुनाई गई थीं उन पर सकारात्मक प्रभाव दोगुना रहा। उनके कोर्टिंसोल के स्तर में कमी और ऑक्सीटोसिन के स्तर में इजाफा हुआ। बच्चों ने खुद भी दर्द व परेशानी में कमी महसूस की।

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अध्ययन के नेतृत्वकर्ता ब्रॉकिंगटन कहते हैं, ‘यह अध्ययन आइसीयू के सामान्य वातावरण में किया गया। सभी बच्चों को अलग-अलग ने कहानियां सुनाईं। उन्हें सामान्य दुकानों पर उपलब्ध किताबों से कहानियां सुनाई गईं। दरअसल, कहानियां बच्चों को दूसरी दुनिया में ले जाती हैं,  जो अस्पताल से अलग होती है। इससे बच्चों को मानसिक के साथ-साथ शारीरिक सुकून भी महसूस होता है।”

कहानी सुनने वाले बच्चों में भावनात्मक बदलाव भी आए। उदाहरण के लिए, जहां कहानी सुनने वाले बच्चों ने अस्पताल के बारे में लिखा कि यह वह जगह है जहां लोग ठीक होने आते हैं,  वहीं दूसरे समूह के बच्चों ने लिखा कि इस जगह पर लोग बीमार होने पर आते हैं। इसी प्रकार कहानी सुनने वाले बच्चों का मानना था कि नर्स उन्हें ठीक करने आती हैं, जबकि दूसरे समूह के बच्चों का कहना था कि नर्स उन्हें इंजेक्शन देने आती हैं।

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