मनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो परंतु,उसकी परछाई सदैव काली होती है… “मैं श्रेष्ठ हूँ” यह आत्मविश्वास है लेकिन….“सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ” यह अहंकार है ।
अहंकार कभी किसी का काम नही आया। जो अहंकार को पलता है उसका पतन भी उतना ही जल्दी होता है इस लिए हमें हमेशा अच्छी सोच रखनी चाहिए।
किसी भी मनुष्य में अहम की भावना ठीक नहीं। जरूरी है कि हम अपने साथ दूसरे की खूबियों को भी जानने की कोशिश करें।
ऐसे करने से न ही कभी अहम होगा और न ही किसी को कम आंकेंगे।









