धर्म और अधर्म सिर्फ सुख के समय ही दिखते और महसूस होते हैं। मुसीबत के समय सिर्फ इंसानियत ही नजर आती है।
सही मायने में अगर आपमें इंसानियत है तो धर्म शब्द के आगे कभी अ नहीं जुड़ेगा और धर्म कभी अधर्म का रूप नहीं लेगा। हमारी एक अच्छी सोच सिर्फ हम तक नही रहती बल्कि असंख्य लोगों पर अपना प्रभाव डालती है। अगर हम सोचे की हमें रोज़ एक ऐसा काम करना है जिसमें हमारे फायदे के अलावा किसी और का भी फायदा हो तो एक का नहीं कई लोगों का भला होगा।










