संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला किया। संयुक्त राष्ट्र के ‘शांति की संस्कृति’ फोरम में चर्चा के दौरान भारत ने अल्पसंख्यकों और महिलाओं से बर्ताव को लेकर पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से आतंकवाद के साजिशकर्ताओं के खिलाफ दृढ राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि आतंकवाद फैलाने के साथ इसे संरक्षण देने वाले और फलने-फूलने में मदद करने वालों की घेराबंदी करनी होगी। खासकर जिन संगठनों पर सुरक्षा परिषद ने रोक लगाई है उनके खिलाफ हमें एकजुट होना होगा।
भारत ने कहा कि आतंकियों ने अपने नेटवर्क का जाल सीमाओं के पार तक फैला लिया है जो शांति के लिए खतरा है। आतंकी नेटवर्क से सबसे अधिक प्रभावित बच्चे हो रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाल संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने के लिए आतंकवाद से मुकाबला करने की इसकी ऊर्जा को कार्रवाई में तब्दील करने की जरूरत है। सदस्य देशों को आतंकवाद के प्रायोजकों के खिलाफ भी मजबूत इच्छाशक्ति दिखानी होगी।
भारत ने कहा, हमने फिर यूएन के मंच पर भारत के खिलाफ पाकिस्तान की हेट स्पीच को सुना। ये ऐसे वक्त पर हुआ है जब पाकिस्तान अपने देश में व अपनी सीमाओं पर लगातार हिंसा की संस्कृति अपनाए हुए है। मानवाधिकार को लेकर पाकिस्तान का दयनीय रिकॉर्ड और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए उसका बर्ताव अंतर्राष्ट्रीय जगत के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल यहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ होता है।
पाकिस्तान में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति दयनीय है, क्योंकि उनका अपहरण व दुष्कर्म किया जाता है। उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर शादी कराई जाती है। महामारी ने इसमें और इजाफा किया है। भारत के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने से पहले, जहां सभी धर्मों को संविधान के अनुसार समान अधिकार दिए गए हैं। पाक प्रतिनिधियों को धार्मिक अल्पसंख्यों को लेकर अपने सिस्टम और रिकॉर्ड की तरफ जरूर देखना चाहिए।










