Google Analytics Meta Pixel यशोदा हॉस्पिटल्स में आधुनिक तकनीकों से जटिल फेफड़ों की बीमारियों का इलाज - Ekhabri.com

यशोदा हॉस्पिटल्स में आधुनिक तकनीकों से जटिल फेफड़ों की बीमारियों का इलाज

रायपुर/हैदराबाद। फेफड़ों से जुड़ी गंभीर और जटिल बीमारियां तेजी से स्वास्थ्य संबंधी बड़ी चुनौती बन रही हैं। टीबी, अस्थमा, सीओपीडी, निमोनिया, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज और फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों में समय पर पहचान और सही उपचार मरीज के जीवन और रिकवरी पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। चिकित्सा क्षेत्र में विकसित हो रही आधुनिक तकनीकों ने अब इन बीमारियों की जांच और उपचार के लिए कई नए विकल्प उपलब्ध कराए हैं।

 

हैदराबाद के हाईटेक सिटी स्थित यशोदा हॉस्पिटल्स के पल्मोनोलॉजी विभाग में एडवांस्ड डायग्नोस्टिक और इंटरवेंशनल तकनीकों के माध्यम से जटिल श्वसन रोगों की जांच और उपचार किया जा रहा है। अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक तकनीक की मदद से फेफड़ों के उन हिस्सों तक भी पहुंच संभव हुई है, जहां पारंपरिक तरीकों से जांच करना चुनौतीपूर्ण माना जाता था।

 

कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. वी. प्रतिभ प्रसाद के अनुसार, अस्पताल में नेविगेशनल ब्रोंकोस्कोपी, कोन बीम सीटी गाइडेड बायोप्सी और आर्किमिडीज ट्रांसब्रोंकियल टनलिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकों की सहायता से फेफड़ों में मौजूद संदिग्ध नोड्यूल्स और अन्य जटिल समस्याओं की जांच अधिक सटीक तरीके से करने में मदद मिलती है।

 

भारत की पहली समर्पित लंग नोड्यूल क्लिनिक

 

यशोदा हॉस्पिटल्स में भारत की पहली समर्पित लंग नोड्यूल क्लिनिक शुरू किए जाने का दावा किया गया है। इस क्लिनिक का उद्देश्य फेफड़ों में पाए जाने वाले संदिग्ध नोड्यूल्स की समय पर जांच और फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

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अस्पताल में अस्थमा, सीओपीडी, ब्रोंकिएक्टेसिस और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज जैसी पुरानी एवं जटिल बीमारियों के लिए विशेष क्लिनिक भी संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा Qure.ai और Imbio जैसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग फेफड़ों के नोड्यूल्स और अन्य जटिल स्थितियों की पहचान में विशेषज्ञों की सहायता के लिए किया जा रहा है।

 

छोटे चीरे से जटिल सर्जरी, रिकवरी में मदद

 

फेफड़ों की सर्जरी के क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी और वीडियो असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी यानी VATS ने उपचार के नए विकल्प उपलब्ध कराए हैं। इन मिनिमली इनवेसिव तकनीकों के जरिए कई जटिल फेफड़ों की सर्जरी छोटे चीरे से की जा सकती हैं।

 

यशोदा हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट लंग ट्रांसप्लांट एवं रोबोटिक और मिनिमली इनवेसिव थोरैसिक सर्जन डॉ. मंजूनाथ बाले के अनुसार, आधुनिक रोबोटिक और VATS तकनीकों से कई मामलों में पारंपरिक सर्जरी की तुलना में छोटे चीरे के माध्यम से उपचार संभव है। इससे कुछ मरीजों में सर्जरी के बाद होने वाले दर्द और रिकवरी से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

 

टीबी कैविटी, डेस्ट्रॉयड लंग, फंगल बॉल, फेफड़ों का कैंसर, छाती में हवा भरना, पस जमा होना और फेफड़ों के आसपास तरल पदार्थ जमा होने जैसी जटिल स्थितियों में भी इन आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।

 

डॉ. मंजूनाथ बाले ने वर्ष 2023 में भारत की पहली सिंगल पोर्ट रोबोटिक सर्जरी करने का दावा किया है। हाल ही में उन्होंने दक्षिण भारत में पहली सिम्पेथेटिक ट्रंक रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी करने की जानकारी भी दी है।

 

गंभीर मरीजों के लिए लंग ट्रांसप्लांट महत्वपूर्ण विकल्प

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फेफड़ों की गंभीर और अंतिम अवस्था की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए लंग ट्रांसप्लांट एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प माना जाता है। इस प्रक्रिया में खराब हो चुके फेफड़े को हटाकर ब्रेन-डेड डोनर से प्राप्त फेफड़े का प्रत्यारोपण किया जाता है।

 

आईएलडी, गंभीर सीओपीडी, ब्रोंकिएक्टेसिस और पैराक्वाट पॉइजनिंग जैसी गंभीर स्थितियों में विशेषज्ञों की विस्तृत जांच के बाद मरीज को लंग ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त माना जा सकता है। अस्पताल के अनुसार, डॉ. मंजूनाथ बाले उस टीम का हिस्सा भी रहे हैं जिसने भारत में पैराक्वाट पॉइजनिंग से प्रभावित मरीज का सफल लंग ट्रांसप्लांट किया था।

 

आधुनिक इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, एआई आधारित डायग्नोस्टिक तकनीक, रोबोटिक एवं मिनिमली इनवेसिव सर्जरी और लंग ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाओं के माध्यम से यशोदा हॉस्पिटल्स फेफड़ों की जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए समय पर जांच, सटीक उपचार और बेहतर रिकवरी की दिशा में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है।

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