- नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा
का विश्राम
रायपुर। आचार्य पं.युवराज पाण्डेय ने कहा कि भटका हुआ साधक कभी सत्य को प्राप्त नहीं कर सकता है, हर पंद्रह दिन में भक्ति बदलना ठीक नहीं है। आदर-सत्कार सभी देवी-देवताओं का करो, पूजा करो, प्रसाद ग्रण करो, लेकिन पागलपन वाली भक्ति एक में ही होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीजनल भक्ति ठीक नहीं है।

आचार्य युवराज आदर्श नगर मोवा में चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण के आखिरी दिन बुधवार को गीता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमेशा ईश्वर के सामने अबोध बालक बने रहे, जिस तरह छोटे बालक की हर आवश्यकता उसकी मॉ समझती है, ठीक उसी तरह ईश्वर को एक अबोध शिशु के रूप में पुकारे, तो ईश्वर आपकी सुनेंगे, आपके बारे में सोचेंगे, आपकी रक्षा भी करेंगे। आचार्य युवराज ने समय के महत्व को गीता के सार के जरिए श्रोताओं को समझाते हुए कहा कि समय बड़ा बलवान है, सब कुछ पहले से ही निश्चिंत है, समय के आगे कोई कुछ भी नहीं है, जो प्रारब्ध में लिखा है, वहीं होगा।उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध कोई विकल्प नही है। शांति के आखरी रास्ते तक चलना चाहिए। उन्होंने अर्जुन व भगवान कृष्ण के संवाद को विस्तार से बताया और कलयुग में भगवान श्री कृष्ण के संदेश का जीवन में उतारने का संकल्प दिलाया।

कथा के अंतिम दिन भगवान भोलेनाथ पर बेल पत्रों की वर्षों हुई। आचार्य युवराज ने देवी जसगीत भी सुनाया, अंतिम दिन हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पूरी उत्सुकता से भाग लिया और डबडबाई आंखों से आचार्य को विदाई दी। कथा विश्राम के अंतिम दिन आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। प्रबंधन में जुटे लोगों को भी धन्यवाद दिया।











