उत्तर प्रदेश के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री, झारखंड के प्रभारी और स्टार प्रचारक आरपीएन सिंह ने कांग्रेस का हाथ छोडकर भाजपा का कमल थाम लिया है। इस मौके पर कांग्रेस में 32 साल के योगदान को याद करते हुए सिंह ने कहा कि अब न तो पहले जैसी पार्टी रह गई है और न ही वह सोच रह गई है। सिंह को भाजपा पूर्वी उत्तर प्रदेश के कद्दावर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता को पडरौना में स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार सकती है। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मौर्य भाजपा से इस्तीफा देकर सपा में शामिल हो गए हैं।
कुशीनगर लोकसभा सीट से सांसद और मनमोहन सिह सरकार में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रहे आरपीएन सिह ने कहा कि भाजपा में शामिल होने की सलाह उन्हें लंबे समय से दी जा रही थी। हाल के वर्षों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में बही विकास की बयार, सांस्कृतिक धरोहरों का पुनर्रोद्धार, गरीब कल्याण योजनाओं की सफल डिलेवरी और कानून-व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन को देखते हुए आखिरकार उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला ले ही लिया। कांग्रेस में अपने पुराने सहयोगी रहे और मौजूदा मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिधिया की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होते हुए उन्होंने कहा, ‘देर आए, दुरुस्त आए।”
आरपीएन सिंह का भाजपा परिवार में स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि वह 2004 से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के पीछे पड़े थे और उन्हें गलत पार्टी में अच्छा नेता बताते हुए भाजपा में आने की सलाह दे रहे थे। बकौल धर्मेंद्र प्रधान गृह राज्यमंत्री के रूप में आरपीएन सिंह से मुलाकात के दौरान भी उन्होंने नरेन्द्र मोदी के साथ जुड़ने और उनके विकास के प्रयासों में सहयोग करने को कहा था। आरपीएन सिह ने भी प्रधानमंत्री मोदी के सपने को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास का भरोसा दिया।










