देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथ खाली रह गये। विशेषकर असम और केरल जैसे राज्यों में तमाम संभावनाओं के बावजूद पार्टी की हार से साफ हो गया है कि कांग्रेस रणनीति और नेतृत्व की कमियों से अब तक सबक नहीं ले पाई है। यानी कांग्रेस का नेतृत्व सत्ता विरोधी माहौल के बाद भी जनमत को अपने पक्ष में करने में विफल रहा।
कांग्रेस के नए अध्यक्ष के चुनाव से पहले इस चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए पार्टी में फिर उठापटक के आसार बढ़ गए हैं, क्योंकि पार्टी के असंतुष्ट समूह (जी-23) के नेताओं ने कांग्रेस के सिकुड़ते आधार को लेकर जो सवाल उठाए थे, वे ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं। जाहिर है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए पार्टी के मौजूदा हालात को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देना भी इन नतीजों के बाद आसान नहीं होगा।
इन पांच राज्यों में चुनावी रणनीति का संचालन कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व और उनके करीबी रणनीतिकारों के हाथ में ही रहा। इसके बावजूद असम और केरल जैसे राज्यों में सत्ता की दावेदार होने के बावजूद जीत से बहुत दूर रह गई। असम में बदरूदीन अजमल की पार्टी से गठबंधन करने का रिस्क लेने से लेकर केरल में केरल कांग्रेस मणि जोसेफ को एलडीएफ गठबंधन में जाने देने का खामियाजा भुगतने जैसी चूक की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाने पर चिंतन शुरू हो गया है।
महत्वपूर्ण बात है कि इन पांच राज्यों के चुनाव के दौरान कांग्रेस नेतृत्व का सबसे ज्यादा जोर केरल और असम पर था। राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका वाड्रा ने दोनों सूबों में सबसे ज्यादा चुनावी सभाएं भी कीं।
असम में साफ झलकता है कि कांग्रेस का नेतृत्व मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में सक्षम साबित होता नजर नहीं आ रहा। द्रमुक के साथ गठबंधन के कारण तमिलनाडु में वह सत्तारूढ़ खेमे की साझेदार भले बन जाए, मगर सियासी हकीकत तो यही है पांच राज्यों के चुनाव में राजनीतिक रूप से कांग्रेस की झोली में कुछ भी नहीं आया है।
कांग्रेस को अपनी अंदरूनी राजनीतिक चुनौती में भारी इजाफे के साथ अब ज्यादा मजबूत होकर उभरे क्षेत्रीय दलों के प्रभाव को थामने की दोहरी चुनौती होगी। बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में स्टालिन के मजबूत होने से साफ हो गया है कि एक ओर जहां सूबों में कांग्रेस का आधार घट रहा है, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय पार्टियां और उनके नेता राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्षी राजनीति में उसकी जगह के लिए बड़ा खतरा बनते नजर आ रहे हैं।
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