आज मंगलवार है। इस दिन भगवान हनुमान जी को चोला चढ़ने का विशेष महत्व है। तकलीफ और बाधाओं से खुद को दूर रखने के लिए चोला जरूर चढ़ना चाहिए। खयाल रहे इसे पुरुष स्वच्छ कपड़ो के साथ सात्विकता के साथ चढ़ाएं।
हनुमान जी को चोला चढ़ाने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सबसे शुभ माना गया है। इस दिन स्नानादि से निवृत होकर लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
हनुमान मंदिर या फिर घर में बजरंगबली की प्रतिमा पर गंगाजल से अभिषेक करें। अब एक साफ वस्त्र से प्रतिमा को पोछें।
सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर सबसे पहले हनुमान जी के चरणों में लगाएं और फिर प्रतिमा पर ऊपर से लेकर पैरों तक उन्हें चोला चढ़ाएं।
चोला चढ़ाने के बाद चांदी की वर्क, जनेऊ, साफ वस्त्र पहनाएं। अब 21 या 11 पीपल के पत्तों पर उसी सिंदूर से श्रीराम लिखकर हनुमान जी को पहना दें।
बजरंगबली के चने, गुड़, मिठाई, पान, सुपारी चढ़ाएं और फिर धूप, दीप लगाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
आरती करें और हनुमान जी के चरणों से थोड़ा सा सिंदूर लेकर मस्तिष पर लगा लें। कहते हैं इससे तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही इस सिंदूर घर में मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
चोला चढ़ाने का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी ने माता सीता से मांग में सिंदूर लगाने का कारण पूछा तो वो बोलीं कि ये सिंदूर पति की लंबी आयु के लिए लगाया जाता है। श्रीराम की दीर्धायु के लिए इसे मैं अपनी मांग में लगाती हूं, इससे वे बहद प्रसन्न होते हैं। इतना सुनकर हनुमान जी ने सोच में डूब गए कि एक चुटकी भर सिंदूर से प्रभु श्रीराम प्रसन्न होते हैं तो अगर मैं इसे अपने पूरे शरीर पर धारण कर लूं तो उनकी प्रसन्नता का पात्र बन सकता हूं। हनुमान जी ने तब अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। श्रीराम ने उन्हें देखा तो मुस्कुरा दिए, तब हनुमान जी बोले प्रभु ये आपकी लंबी आयु के लिए है। उनकी भक्ति देख राम भगवान बहुत प्रसन्न हुए और बोले आज से जो भी तुम्हें सिंदूर चढ़ाएगा उसके सारे तमाम दुख दूर हो जाएगी, उस जातक पर मेरी भी कृपा बरसेगी।
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