रायपुर । स्वतंत्रता दिवस केवल देश की आजादी का पर्व नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का संकल्प भी है। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड की संगीता देवी की कहानी इसी संकल्प की प्रेरक मिसाल है। कभी परिवार की जरूरतों और कृषि कार्य के लिए छोटे-छोटे ऋण पर निर्भर रहने वाली संगीता आज स्वयं ई-रिक्शा चलाकर हर महीने करीब 15 से 18 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं और ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
# बिहान से जुड़कर मिली स्वरोजगार की नई राह
ग्राम पंचायत छेरडाढ़ की दीपक स्व-सहायता समूह की सदस्य संगीता देवी वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण सुविधा और विभिन्न आजीविका गतिविधियों की जानकारी मिली। उन्होंने छोटे-छोटे ऋण लेकर कृषि कार्य और परिवार की जरूरतों को पूरा किया।
समय के साथ संगीता के मन में अपनी स्थायी आय का साधन विकसित करने की इच्छा मजबूत हुई। इसी सोच के साथ उन्होंने दुलदुला संकुल संगठन के समक्ष ई-रिक्शा के माध्यम से स्वरोजगार शुरू करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने दुलदुला से पतराटोली मार्ग पर सवारी मिलने की संभावनाओं का भी आकलन किया।
उनकी पहल और आत्मनिर्भर बनने की इच्छाशक्ति को देखते हुए मुख्यमंत्री जशपुर एक्सप्रेस योजना के तहत वर्ष 2025 में उन्हें बैटरी चालित ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया।
# रक्षाबंधन पर मिला ई-रिक्शा बना आत्मनिर्भरता का प्रतीक
वर्ष 2025 में रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिले की 13 दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए गए थे। संगीता देवी के लिए यह ई-रिक्शा महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत बन गया।
ई-रिक्शा मिलने के बाद संगीता ने स्वयं इसका संचालन शुरू किया। करीब एक वर्ष से वे नियमित रूप से ई-रिक्शा चला रही हैं। उन्हें प्रतिदिन लगभग 700 से 800 रुपये की आमदनी होती है। परिचालन और अन्य खर्च निकालने के बाद उनकी मासिक शुद्ध आय लगभग 15 से 18 हजार रुपये तक पहुंच रही है।
# बढ़ी आय तो मजबूत हुआ परिवार
ई-रिक्शा से होने वाली आमदनी ने संगीता के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। अब वे अपने बच्चों के पालन-पोषण और उनकी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं। परिवार की जरूरतों में आर्थिक सहयोग देने के साथ आवश्यकता पड़ने पर पति की भी मदद करती हैं।
आर्थिक आत्मनिर्भरता ने संगीता के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत किया है। उनका कहना है कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें समूह की ताकत और आजीविका के नए अवसरों की जानकारी मिली। ई-रिक्शा ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया।
# दूसरी महिलाओं को भी दे रहीं स्वरोजगार की प्रेरणा
संगीता अब अन्य बिहान दीदियों को भी पारंपरिक कृषि गतिविधियों के साथ गैर-कृषि गतिविधियों और स्वरोजगार के नए अवसर अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता बताती है कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें वित्तीय सहायता, आजीविका के अवसर और उचित मार्गदर्शन दिया जाए तो वे अपनी मेहनत और इच्छाशक्ति से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं।
उनकी कहानी यह भी साबित करती है कि एक महिला की आर्थिक आत्मनिर्भरता का सकारात्मक असर पूरे परिवार पर पड़ता है। इससे परिवार की आर्थिक मजबूती के साथ बच्चों की शिक्षा, जीवन-स्तर और सामाजिक आत्मविश्वास को भी नई दिशा मिलती है।
संगीता देवी ने ई-रिक्शा उपलब्ध कराने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अवसर प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन जशपुर और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि ई-रिक्शा ने उन्हें केवल आय का साधन नहीं दिया, बल्कि सम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संगीता देवी की कहानी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता का संदेश देती हैं।
स्वावलंबन से सम्मान, आजीविका से आत्मविश्वास और मेहनत से सफलता की राह तैयार होती है।










