मांगों के समर्थन में दिल्ली कूच करने की कोशिश कर रहे किसानों को शंभू बॉर्डर और सिंघु बॉर्डर पर रोककर रखा गया है। किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए तगड़ी बैरिकेडिंग की गई और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। किसानों ने भी गोलों से बचने का ब्रह्मास्त्र खोज लिया है। किसानों ने आंसू गैस के गोलों के असर को कम करने के लिए 4 इंतजाम किए हैं। पहला, गीली बोरियां, दूसरा पानी के टैंकर, तीसरा आसमान में पतंगबाजी और चौथा गैस मास्क। इन चार इंतजामों के जरिए किसान गोलों का असर कम करके प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं।
किसानों ने ये तरकीब बहुत ज्यादा नहीं अपनाई थी, लेकिन बड़ी संख्या में बोरियों को पानी से भिगो कर रखा गया और जैसे ही आंसू गैस का कोई गोला उनके पास भीड़ में आकर गिरता, कुछ किसान गीली बोरियां डाल देते। आंसू गैस का असर ठंडा पड़ जाए। इसके अलावा कई किसानों को हाथों में पानी के पाइप पकड़े हुए देखा गया। पाइप से पानी की बौछार हो रही है और इस बौछार के जरिए हवा में ही आंसू गैस के गोलों का असर कम करते देखा गया। बाकायदा किसानों ने पानी के टैंकर मंगवा लिए जिसके पानी का इस्तेमाल फुहारा बरसाकर गैस के गोलों का असर हल्का किया गया।
किसानों और पुलिस के बीच झड़प का सिलसिला चलता रहा। दिन में जहां पुलिस ने ड्रोन से आंसू गैस के गोले बरसाए, वहीं रात को किसानों की भीड़ को तितर बितर करने के लिए टियर गन से आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसका सामना किसानों ने गैस मास्क पहनकर भी किया।









