सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ सोमवार को वित्त मंत्रालय की हुई बैठक में सरकार ने बैंकों को कर्ज वितरण की रफ्तार को बनाए रखने को कहा है। कोरोना काल से पहले से ही भारत में बैंकिग कर्ज वितरण की रफ्तार कोई खास नहीं थी
ताजे आंकड़े बताते हैं कि अब बैंकों की तरफ से ज्यादा कर्ज वितरित किए जा रहे हैं। तीन जून, 2022 को समाप्त पखवाडेे के दौरान बैंकिग कर्ज वितरण में 13.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है जो पिछले तीन वर्षों की सबसे तेज रफ्तार है।
वित्त राज्य मंत्री डा. भागवत किशनराव कराड ने बैंकों से कहा है कि मौजूदा हालात में कर्ज की तेज रफ्तार को बनाए रखना जरूरी है। बैंकों से यह भी आग्रह किया गया है कि यूक्रेन-रूस युद्ध से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की कर्ज की जरूरत पर खास तौर पर ध्यान देने की जरूरत है। पहले बैठक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होनी थी लेकिन दूसरे कार्य में व्यस्त होने की वजह से बैठक की अध्यक्षता वित्त राज्य मंत्री ने की।
बैठक में बैंकों में फंसे कर्ज (एनपीए) की स्थिति की भी समीक्षा की गई। गैर आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एनपीए की स्थिति को लेकर सरकार ने संतोष जताया है। वर्ष 2021-22 में कुल अग्रिम के मुकाबले बैंकों के फंसे कर्ज का स्तर 5.97 प्रतिशत रहा है जबकि वर्ष 2020-21 में 7.30 प्रतिशत और वर्ष 2019-20 में 9.20 प्रतिशत थी। बैंकों को कहा गया है कि एनपीए के स्तर को घटाने की कोशिश जारी रखनी होगी ताकि यह वैश्विक स्तर पर आ सके। बैठक में अलग-अलग बैंकों ने अपने स्तर पर एनपीए घटाने के तरीकों के बारे में बताया।










