Google Analytics Meta Pixel Kalashtami Pauranik Katha : आज है कालाष्टमी, जानें काल भैरव की ये पौराणिक कथा - Ekhabri.com

Kalashtami Pauranik Katha : आज है कालाष्टमी, जानें काल भैरव की ये पौराणिक कथा

Kalashtami Pauranik Katha: हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का दिन कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन काल भैरव की पूजा करते हैं और आशीर्वाद स्वरूप मनचाह वरदान पाते हैं. लेकिन कालाष्टमी का दिन भैरव पूजा को क्यों समर्पित है इसकी एक पौराणिक कथा है. जो लोग काल भैरव की पूजा करते हैं उनके दुश्मन सदा उनसे दूर रहते हैं. उनका बुरा करने वाले लोगों का अपने आप ही बुरा होने लगता है. काल भैरव की ये पौराणिक कथा ब्रह्मा विष्णु और महेश से जुड़ी है. काल भैरव कैसे प्रकट हुए और उन्हें ब्रह्मा जी क्यों दंडित किया ये कथा उस बारे में है. काष्टमी के लिए काल भैरव की कथा पढ़ने और सुनने वाले को भी शुभ फल मिलते हैं. तो आइए जानते हैं काल भैरव की पौराणिक कथा

 

कालाष्टमी / काल भैरव की पौराणिक कथा

 

ये कहानी है भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश की. एक बार की बात है देवता लोग में त्रिदेवों के बीच एक बहस छिड़ गई की ब्रह्मा, विष्णु और महेश में सर्वश्रेष्ठ कौन है. जब ये तीनों देवता आपस में सहमति नहीं बना पाए तो सभी देवताओं को बुलाकर एक बैठक हुई. हर देवता से ये प्रश्न पूछा गया कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में से सर्वश्रेष्ठ कौन है. सभी देवतागणों ने अपने जवाब दिए, भगवान शिव और विष्णु उन जवाबों से सहमत हुए लेकिन ब्रह्मा जी ने उनके जवाब स्वीकार नहीं किए. ब्रह्मा जी ने क्रोध में आकर भगवान शिव को अपशब्द कह दिए.

 

ब्रह्मा जी से अपने लिए अपशब्द सुनकर भगवान शिव अत्यंत क्रोध में आ गए. इसी गुस्से के कारण भगवान शिव के रौद्र रूप भैरव का जन्म हुआ. कथा के अनुसार शिव के भैरव अवतार का वाहन काला कुत्ता है. जिसके हाथ में छड़ी थी, इस अवतार को महाकालेश्वर भी कहा जाता है. भगवान शिव का रौद्र रूप देखकर बैठक में मौजूद सभी देवता घबरा गए. भैरव इतने गुस्से में थे कि उन्होंने भगवान ब्रह्मा के 5 सिर में से 1 सिर काट के अलग कर दिया. जिसके बाद भगवान ब्रह्मा के 4 ही सिर बचे.

Read Also  सुविचार: एक हसरत ही तो है जो रोज चलना सिखाती है

 

 

भगवान ब्रह्मा का सिर काटने की वजह से भगवान भैरव पर ब्रह्म हत्या का पाप लगा. इस घटना के बाद भगवान ब्रह्मा ने भैरव बाबा से माफी मांगते हुए अपनी गलती स्वीकारी. माफी मांगने के बाद भगवान शिव शांत हुए और अपने असली रूप में आए. लेकिन बाबा भैरव ने जो ब्रह्म हत्या की उससे वे पाप के भागी बने. जिसके दंड स्वरूप उन्हें भिखारी के रूप में कुछ समय रहना पड़ा. लेकि लंबे समय तक भिखारी के रूप में रहने के बाद उनका दंड वाराणसी में समाप्त हुआ. जिस जगह भगवान शिव का दंड समाप्त हुआ उस जगह का नाम दंडपाणी पड़ा.

Share The News




CLICK BELOW to get latest news on Whatsapp or Telegram.

 


 ‘विष्णु भैया’ का घर बना बहनों का मायका, तीजा-पोरा में उमड़ा उल्लास

By Reporter 5 / September 13, 2026 / 0 Comments
रायपुर। नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास शनिवार को तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास का केंद्र बना रहा। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से बड़ी संख्या में माताएं, बहनें और बेटियां मुख्यमंत्री...

अभियंता दिवस पर पीडब्ल्यूडी चौक में विश्वेश्वरैया को किया जाएगा नमन

By User 6 / September 13, 2026 / 0 Comments
रायपुर। भारत रत्न महान अभियंता डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर 15 सितंबर 2026, मंगलवार को अभियंता दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर राजधानी रायपुर में उनके सम्मान में पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।   रायपुर नगर पालिक...

श्रवण यंत्र मिलते ही लौटी प्रमिला की सुनने की क्षमता, सपनों को मिले पंख

By User 6 / September 16, 2026 / 0 Comments
रायपुर। आधुनिक तकनीक और समय पर मिली सरकारी मदद किसी व्यक्ति के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है, नारायणपुर जिले की कक्षा 8वीं की छात्रा प्रमिला इसकी मिसाल बन गई है। श्रवण बाधिता के कारण लंबे समय से...

मुंबई में BOCW का राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा पर मंथन

By User 6 / September 12, 2026 / 0 Comments
रायपुर। भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकारों (BOCW) के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक हितों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। 11 और 12 सितंबर 2026 को आयोजित इस सम्मेलन में देशभर...

नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क को तोड़ें, विजय शर्मा ने दिए सख्त निर्देश

By User 6 / September 13, 2026 / 0 Comments
रायपुर, 13 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में कबीरधाम जिले के कवर्धा स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय...

भोरमदेव शक्कर कारखाने ने रचा इतिहास, लगातार दो साल देश में सबसे ज्यादा रिकवरी

By User 6 / September 14, 2026 / 0 Comments
रायपुर/कवर्धा । छत्तीसगढ़ के कवर्धा स्थित भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ने लगातार दो वर्षों तक देश में सर्वाधिक शुगर रिकवरी हासिल कर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। इस उपलब्धि के साथ कारखाने को वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए राष्ट्रीय...

नुआखाई पर मुख्यमंत्री साय ने किसानों की सुख-समृद्धि की कामना की

By User 6 / September 15, 2026 / 0 Comments
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई फसल के स्वागत और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले पावन पर्व नुआखाई के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इस अवसर पर अन्नदाता किसानों की सुख-समृद्धि,...

कवर्धा मेडिकल कॉलेज में पहले बैच की पढ़ाई शुरू, छात्रों ने साझा किए संघर्ष

By User 6 / September 17, 2026 / 0 Comments
रायपुर। कबीरधाम जिले की चिकित्सा शिक्षा के इतिहास में बुधवार का दिन महत्वपूर्ण रहा। शासकीय मेडिकल कॉलेज कवर्धा में प्रथम शैक्षणिक सत्र और प्रथम बैच की पढ़ाई का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा...

भंडारा सड़क हादसे पर मुख्यमंत्री साय ने जताया गहरा शोक, अधिकारियों की टीम रवाना

By User 6 / September 12, 2026 / 0 Comments
रायपुर। महाराष्ट्र के भंडारा जिले में नागपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ के नागरिकों की असामयिक मौत पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा शोक व्यक्त किया है।   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हादसे में...

घोलेंग में हुनर को नई उड़ान, टेक्सटाइल प्रशिक्षण से रोजगार के अवसर बढ़े

By User 6 / September 14, 2026 / 0 Comments
रायपुर। कभी घर-आंगन और गांव की परंपराओं तक सीमित रहने वाला हुनर अब रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहा है। जशपुर जिले के ग्राम घोलेंग में पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक तकनीक, कौशल प्रशिक्षण और बाजार की...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *