Google Analytics Meta Pixel असहाय बेटी के लिए मजदूर पिता ने बनाया "मां रोबोट" - Ekhabri.com

असहाय बेटी के लिए मजदूर पिता ने बनाया “मां रोबोट”

गोवा में एक दैनिक मजदूर ने वो काम कर दिखाया है जो अभी तक बड़े-बड़े वैज्ञानिक नहीं कर सके। खुद से खाना खाने में असमर्थ अपनी दिव्यांग बच्ची के लिए बिना किसी तकनीकी ज्ञान के बिपिन कदम ने एक रोबोट बनाया है जो उनकी हाथ-पैर हिलाने में असमर्थ बच्ची को खाना खिलाता है। मां की तरह पसंद-नापसंद जानकर खाना खिलाने वाले इस रोबोट को नाम भी “मां रोबोट” दिया गया है। कदम के इस सफल शोध की गोवा राज्य नवाचार परिषद (जीएसआइसी) ने जमकर प्रशंसा की है और बिपिन कदम को इसके लिए धन मुहैया करा कर इस मशीन पर आगे और काम करने को कहा है। इस रोबोट की वाणिज्यिक उपयोगिता पर भी अध्ययन किया जाएगा।

 

इस अनूठे “मां रोबोट” में खाना प्लेट पर रखा जाता है जो रोबोट का ही हिस्सा है। यह रोबोट उस दिव्यांग लड़की को खाना खिलाता है जो हिल नहीं सकती और अपना हाथ तक नहीं उठा सकती है। इस रोबोट को एक वाइस कमांड देकर बताया जाता है कि लड़की क्या खाना चाहती है, जैसे-सब्जी, चावल-दाल मिलाकर या कुछ और खाना चाहती है। बिपिन कदम ने बताया कि मां रोबोट मौखिक दिशा-निर्देशों पर बेटी को खाना खिलाता है। जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा दे रहे हैं। इसीतरह वह भी अपनी बच्ची को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। ताकि वह किसी और पर निर्भर नहीं रहे। उनका कहना है कि वह अन्य दिव्यांग बच्चों के लिए भी ऐसे ही रोबोट बनाना चाहते हैं। वह इस रोबोट को पूरे विश्व में ले जाना चाहते हैं।

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पत्नी की बीमारी से हुए लाचार
दैनिक मजदूरी करके घर चलाने वाले बिपिन कदम की पत्नी भी बेहद बीमार हैं और वह अपनी दिव्यांग बच्ची को खाना खिला पाने में असमर्थ हैं। इसलिए कदम को बेटी को खाना खिलाने के लिए काम से छुट्टी लेकर घर आना पड़ता था। 40 साल से ऊपर के कदम दक्षिण गोवा के बेथोरा गांव में पोंडा तालुका के रहने वाले हैं। वह रोजीरोटी के लिए दैनिक मजदूर के तौर पर कोई भी काम कर लेते हैं। उनकी 14 साल की बेटी दिव्यांग है और अपनेआप खाना खाने में असमर्थ है। वह भोजन करने के लिए पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर थी। लेकिन दो साल पहले बिपिन कदम की पत्नी भी बहुत बीमार पड़ गईं और बिस्तर से उठ पाने में असमर्थ हो गईं। उनकी पत्नी यह सोचकर रोती-बिलखती रहती थीं कि वह अपनी बच्ची को खाना नहीं खिला पा रही हैं और वह घंटों भूखी रहती है। कदम की पत्नी ने उनसे आग्रह किया कि वह बेटी को स्वत: ही समय से भोजन कराने का कोई रास्ता निकालें। ताकि वह इसके लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहे।

 

 

चार महीने का अथक परिश्रम
पत्नी की इस बात ने बिपिन कदम को एक ऐसा रोबोट बनाने के लिए प्रेरित किया जो उनकी बच्ची को खाना खिला सके। उन्होंने एक साल पहले ही रोबोट बनाने के संबंध में इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों को खंगालना शुरू किया। लेकिन ऐसा रोबोट कहीं भी उपलब्ध नहीं था। इसलिए उन्होंने खुद ही एक रोबोट बनाने का फैसला किया। उन्होंने साफ्टवेयर की मूलभूत आनलाइन जानकारियां हासिल कीं। बिना आराम किए वह 12 घंटे मजदूरी करते थे। उसके बाद वह बाकी समय रोबोट बनाने के संबंध में शोध करने और सीखने में बिताते थे। चार महीने के अथक परिश्रम के बाद उन्होंने यह रोबोट बनाया। अब जब वह काम से घर लौटते हैं और बेटी उनको देखकर मुस्कुराती है तो उन्हें बहुत ऊर्जा मिलती है।

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