मध्य प्रदेश में पिछले चार आम चुनावों में भाजपा लगातार मजबूत हुई है। इस अवधि में भाजपा का वोट शेयर 10% तक बढ़ गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान कांग्रेस का नुकसान भी नहीं हुआ। मगर, सपा, बसपा, गोंगपा और वामदल लगातार कमजोर होते गए। कांग्रेस ने 2004 से 2019 तक 15 सालों में लगभग 34% का वोट शेयर बरकरार रखा।
छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद 2004 में हुए पहले आम चुनावों में भाजपा ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए लोकसभा की 25 सीटें जीतीं और 48% से अधिक वोट हासिल किए। वहीं, कांग्रेस 4 सीटों के साथ 34% वोटों पर सिमट गई, जबकि छोटे दल को लगभग 11% वोट मिले। 2009 में कांग्रेस को फायदा हुआ और 40% से अधिक वोट मिले। सीटें भी 12 हो गईं। भाजपा 43% वोट के साथ 16 सीटों पर पर खिसक गई। 15 सालों में वोट बैंक के लिहाज से बसपा, सपा और सीपीआई को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
2004 में बसपा को 4.75%, सपा को 3.2%, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को 3.05% और सीपीआई को 0.24% वोट मिले थे। निर्दलियों को 4% से अधिक वोट मिले थे। 2019 में बसपा का वोट बैंक घटकर 2.4 % हो गया, जबकि सपा 0.23 और गोंडवाना 0.3 % वोटों के साथ मैदान में रही। निर्दलीय प्रत्याशियों का वोट 1.91% हो गया। 2014 में भाजपा ने मोदी लहर के बीच 12% वोटों की छलांग लगाई और 54.8% वोट हासिल किया। कांग्रेस 2 सीटों मिली और 35% वोट शेयर पर सिमट गई। छोटे दल 4% वोट ही पा सके। 2019 में भाजपा ने अभी तक के सर्वाधिक 58% वोट हासिल किए, हालांकि फिर भी कांग्रेस का वोट शेयर 2004 के स्तर 34.5% पर रहा।










