सूर्य पर एक ही स्थान पर कम से कम 17 बार तेज लपटें उठने से अंतरिक्ष में विस्फोट हो चुका है। इस हलचल से गुरुवार तक पृथ्वी पर एक मध्यम दर्जे का भू-चुंबकीय तूफान आ सकता है। स्पेस डाट काम ने बताया कि सूर्य की सतह पर एआर 2975 नामक जगह (सनस्पाट) पर अब तक कम से कम 17 बार तेज लपटें निकलते देखी जा चुकी हैं। सूर्य की सतह पर मची इस तेज हलचल का असर पृथ्वी पर भी महसूस किया जाएगा।
विज्ञानियों का मानना है कि पृथ्वीवासी आकाशीय चुंबकीय तूफानों का सामना कर सकते हैं। सूर्य पर सनस्पाट वह क्षेत्र होता है जहां चुंबकीय रेखाएं मुड़ जाती हैं और अचानक दृश्यमान सतह के पास पुन:संरेखित हो जाती हैं। नासा की शक्तिशाली सोलर डायनेमिक्स आब्जरवेटरी ने सूर्य की सतह पर घट रही घटनाओं के आश्चर्यजनक दृश्यों की फोटो ली हैं।
नासा और नेशनल ओशानिक एंड एटमास्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन, वेबसाइट ने कहा कि पहला कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) यानी आवेशित कणों का अंतरिक्ष में बिखरना गुरुवार को देखने को मिलेगा। इसी तरह कम से कम एक और घटना शुक्रवार को होने की उम्मीद है।
यह होगा असर
ऐसा अनुमान है कि आवेशित कणों से निम्न व मध्यम तीव्रता के भू-चुंबकीय तूफान आ सकते हैं। अधिक तीव्रता वाले सौर तूफान बिजली की लाइनों और उपग्रहों को प्रभावित कर उनमें खराबी पैदा कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में कुल मिलाकर सूर्य के अपेक्षाकृत शांत रहने की उम्मीद है। दिसंबर 2019 से शुरू हुआ 11 साल का सौर चक्र अभी शुरुआती दौर में हैं। 11 साल के इस सौर चक्र में आम तौर पर शुरुआत में कम सनस्पाट (धब्बे) और कम विस्फोट होते हैं। 2025 में हम इस समय चक्र के मध्य में होंगे तब सूर्य पर हलचल बहुत तेज देखने को मिल सकती है। विज्ञानी इस बात पर बहस कर रहे हैं कि वर्तमान सौर चक्र कितना तीव्र होगा। वैसे अब तक के पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि सनस्पाट की औसत संख्या सामान्य से कम हो सकती है।










