खास खबर : निजी अस्पताल मौका में मार रहे चौका

  • कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज में निजी अस्पताल दे रहे लाखों का बिल
  • मृत्यु के बाद परिजन भटक रहे अंतिम संस्कार के लिए

केस-1
पिछले 15 दिन से 52 वर्षिय एक मरीज एक निजी अस्पताल में कोरोना का इलाज चल रहा था। 12 दिन पूरे होने के बाद हालत नाजुक हुई, वेंटीलेटर में रखने के बाद भी मरीज की मृत्यु हो गई, अस्पताल का बिल 7 लाख, 600 रुपए बना, जिसे परिजनों को जमा करना पड़ा।

केस-2
60 वर्षीय कोरोना से पीड़ित महिला की मौत हो गई, निजी अस्पताल में बिल की रकम करीब 4 लाख देना पड़ा। मृत्यु के बाद परिजन अंतिम संस्कार करने के लिए प्रशासन से गुहार लगाते रहे, कुछ नहीं हुआ।आखिरकार निजी अस्पताल की एंबुलेंस को किराया देकर मुक्तिधाम जाना पड़ा। प्रशासन की तरफ से कोई भी सुविधा नहीं मिली।

केस-3
राजधानी के एक बड़े निजी अस्पताल में इलाज के दौरान कोरोना पीड़ित मरीज ने दम तोड़ा। मरीज के इलाज का बिल बना 12 लाख 50 हजार। लगभग 8 लाख की राशि जमा कराई लगई, बची हुई रकम पूरी नही पटा पाने के कारण परिजनों को मृतक का शव लेने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। तमाम मिन्नत के बाद करीब ढेड़ लाख और जमा करने के बाद मृतक का शव सौंपा गया।

रोज ऐसे दर्जनो शिकायते सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से सामने आता है जिसके चलते भगवान का दर्जा रखने वाले डॉक्टर, नर्स और वर्तमान के कोरोना वारियर्स के प्रति केवल आम लोगो मे गुस्सा दिखता है।दरअसल कोरोना संक्रमण काल मे निजी अस्पताल फायदा उठाने का कोई कसर नही छोड़ रहे है। कोविड इलाज के लिए सरकार ने जो दर (रेट) निधार्रित किए गए, उसके बाद यदि निजी अस्पताल का बिल देखा जाए तो इससे ज्यादा एक मोटी रकम मरीजो को चुकानी पड़ रही है। जिसके चलते यह कहने में किसी को संकोच नही की सरकार का दिशा निर्देश का निजी अस्पताल खुलेआम उलंघन कर रहे हैं।

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आए दिन सोशल मीडिया में खबरे और लोगों की परेशानियो से जुड़ी खबरे वायरल होती है,कुछ खबरों के पीछे व्यक्तिगत स्वार्थ हो सकता है, मगर ज्यादातर खबरें परिजनों के बताए अनुसार ही सामने आ रही है। सबसे ज्यादा दुःखद हालात तब सामने आता है, जब इलाज के दौरान मृत्यु होने के बाद भी उसमें कमाई ढूंढी जाए, यदि परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है, तो यह निराशाजनक ही है।इसकी मुख्य वजह सरकार और प्रशासन की लाचार व्यवस्था है, जिसके कारण न तो समय पर अंतिम संस्कार हो पा रहा है और न ही लोगों को आसानी से मुक्तिधाम मृतक को ले जाने के व्यवस्था हो पा रही है।

एक ओर प्रशासन दावा करता है कि सभी कोरोना संक्रमित से होने वाली मौत का अंतिम संस्कार प्रशासन की ओर से मुफ्त में होता है, वहीं दूसरी ओर सुविधा न होने की बात कह कर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते नजर आ रहे हैं।जानकारी के मुताबिक नगर निगम ने राजधानी में लगभग 8 मुक्तिधाम हैं, जहां कोरोना मरीजो का मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार किया जा रहा है। मंगलवार को कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद अजीब किस्सा सुनने को मिला।


बुधवार को Ekhabri.com से चर्चा के दौरान कुछ परिजनो ने बताया कि मृत शरीर को अंतिम संस्कार तक ले जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला। संबंधित अधिकारियों से एंबुलेंस की सुविधा के लिए कहा गया, उस पर उन्होंने प्राइवेट एंबुलेंस करने को कह दिया। किसी तरह से यह इंतजाम हुआ और मुक्तिधाम के लिए परिजन निकले तो उन्हें मृतक के अंतिम संस्कार के लिए 4 पीपीई किट खरीदना पड़ा, जिसे दो बॉड़ी पकड़ने वाले और दाहसंस्कार करने वाला औैर एक पंडित को पहनाया गया। चौकाने वाली बात यह थी गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर को यही नहीं पता था कि अंतिम संस्कार किस मुक्तिधाम में करना। इस तरह घंटों घूमने के बाद नया रायपुर के एक मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया।

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