पर्यावरण को लेकर आज हर कोई चिंतित है। लगातार बढ़ता प्रदूषण हमें आने वाली परेशानी की ओर आगाह कर रहा है। ऐसे में जरूरी है की हम अपनी आदतों को सुधार कर पर्यावरण की चिंता करें और इसे सुनक्षित करने की जिम्मेदारी भी समझें।
आज पर्यावरण दिवस पर क्यों न ऐसे कुछ आसान संकल्प ले कर हम अपनी पृथ्वी और पर्यावरण को सुरक्षित करें।
पहला संकल्प ले की हम अधिक से अधिक पेड़ों को लगाएंगे। हर साल इसकी शुरुआत हम अपने जन्मदिन के दिन से कर सकते हैं। हर साल हम पौधे रोपें और उसे बड़े करने का संकल्प लें।
दूसरा संकल्प
दूसरा संकल्प लें कि हम पॉलीथिन का इस्तेमाल नहीं करेंगे हम कभी भी कोई भी सामान को खरीदारी करते हैं तो सबसे पहले पॉलिथीन की मांग करते हैं लेकिन इसे हम खुद ही रोकना होगा कोई भी सामान खरीदने के बाद हम पॉलीथिन की मांग ना करें और अगर कोई समान पॉलिथीन में दे भी रहा है तो उस व्यवसाय को समझाने की कोशिश करें क्योंकि पॉलिथीन से सबसे ज्यादा पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
तीसरा वचन
तीसरे वचन में हम प्रण करें कि हम गाड़ी के इस्तेमाल कम करेंगे। महानगरों में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के ग्राफ को देखकर यह कई विशेषज्ञ स्पष्ट कर चुके हैं कि यहां पर बढ़ते गाड़ी के इस्तेमाल के कारण प्रदूषण का प्रभाव बढ रहा है। इसलिए हमें गाड़ी के इस्तेमाल को भी काम करना होगा। इससे हमें दो फायदे होंगे अगर हम वाकिंग और साइकिलिंग का उपयोग करते हैं तो हमारी सेहत अच्छी रहेगी। साथ ही गाड़ी से निकलने वाली धूआ पर भी ब्रेक लग जाएगा। इससे प्रदूषण भी रुक जाएगा। इस पहल को अधिक दूरी के लिए तो नहीं लेकिन आसपास की दूरी के लिए जरूर कर सकते हैं।
हमारे देश में बहुत सारी सुंदर प्राकृतिक चीजें जंगल पहाड़ झरने हैं लेकिन हम व्यवसायिक दृष्टिकोण से सोचते हुए लगातार उनकी कटाई और उनसे साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं, इसका जीता जागता उदाहरण है हिल स्टेशन जहां पर व्यवसायीकरण बढ़ने के साथ तो पहाड़ों की कटाई करने लगे, जिसके कारण प्राकृतिक आपदाएं आने लगी। यह सारी चीजें केदारनाथ धाम में भी हम देख चुके हैं। इसके लिए हमें पेड़ और पहाड़ों के साथ-साथ सभी प्राकृतिक चीजों से छेड़छाड़ रुकना होगा।
पांचवा वचन
पांचवा वचन हम लें की पर्यावरण की चिंता सिर्फ 1 दिन नहीं बल्कि साल भर करें। हमें इसे अच्छा बनाने के लिए छोटी-छोटी अपनी आदतों को बदलना है जिससे इसमें प्रभाव पड़ता है। कही भी कचरा ना फेंके, नदी तालाब को स्वच्छ रखें। हमें छोटे से छोटे प्रदूषण के बारे में भी सोचना है। जो पेड़ है उनकी हमें रक्षा करनी होगी और जो खाली स्थान है वहां पेड़ लगाने होंगे तभी हमारी पृथ्वी को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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