कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध मामले में सुनवाई पूरी हो गई और सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले पर कोर्ट में 10 दिनों तक सुनवाई चली और सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया। 16 अक्टूबर तक फैसला आने की उम्मीद है क्योंकि सुनवाई पीठ की अगुआई कर रहे जस्टिस हेमंत गुप्ता 16 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में 23 याचिकाएं लंबित हैं जिनमें कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने 15 मार्च को दिए फैसले में स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध को सही ठहराया था। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि हिजाब इस्लाम धर्म का अभिन्न् हिस्सा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम छात्राओं की ओर से हिजाब पर रोक को धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार का हनन बताया गया। जबकि कर्नाटक सरकार ने कहा कि हिजाब पर रोक नहीं है सिर्फ स्कूलों में जहां यूनीफार्म तय है वहीं पर प्रतिबंध है। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान पक्षकारों से कई सवाल जवाब किए।
गुरुवार को सुनवाई का 10वां दिन था। मुस्लिम छात्राओं की ओर से पेश वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि कर्नाटक सरकार के स्कूलों में हिजाब पर रोक के आदेश से मुस्लिम लड़कियां शिक्षा से वंचित हो रही हैं। लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए। याचिकाकर्ता मुस्लिम छात्राओं की ओर से ही वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने भी प्रतिउत्तर दिया। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सालिसिटर जनरल द्वारा हिजाब विवाद के पीछे गहरी साजिश की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बिना किसी आधार के आरोप लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार के सर्कुलर में पीएफआइ की गतिविधियों का जिक्र नहीं है। उसमें धार्मिक प्रथाओं के पालन को एकता और समानता में बाधा के रूप में बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने मामले को महत्वपूर्ण बताते हुए विचार के लिए पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजने की भी मांग की।
कर्नाटक सरकार ने स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध को सही ठहराते हुए कहा था कि सरकार का आदेश किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। उसमें किसी धार्मिक पहलू को नहीं छुआ गया है। राज्य भगवा शाल, हिजाब आदि सबका सम्मान करता है, लेकिन जब आप स्कूल आते हैं तो वहां यूनीफार्म तय है और उसी में आना होगा। राज्य सरकार ने कहा कि हिजाब पर कोई रोक नहीं है, रोक सिर्फ क्लास रूम तक सीमित है। राज्य में हिजाब पर कोई प्रतिबंध नहीं है और न ही राज्य सरकार का ऐसा कोई इरादा है। राज्य सरकार ने न तो कभी किसी धार्मिक गतिविधि पर रोक लगाई है और न ही किसी को बढ़ावा दिया है। सरकार ने कहा कि स्कूल पंथनिरपेक्ष जगह है, वहां यूनीफार्म में आना होगा।










