भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान की सीमा में गलती से ब्रह्माोस मिसाइल दागे जाने के मामले में तीन अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जांच में पाया गया कि तीनों अधिकारियों ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया था। इसी जांच के आधार पर इन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। वायु सेना ने इस कार्रवाई के साथ ही जांच बंद कर दी है।
पाकिस्तान ने दुर्घटनावश मिसाइल दगने पर कड़ा एतराज जताते हुए भारत से जांच कराने की मांग की थी। बीते नौ मार्च को ब्रह्माोस सुपरसोनिक मिसाइल रूटीन मेंटीनेंस प्रक्रिया के दौरान दुर्घटनावश चल गई थी। यह पाकिस्तान की वायु सीमा में 100 किलोमीटर अंदर करीब 40,000 फीट की ऊंचाई से गिरी। गनीमत यह थी कि मिसाइल में कोई विस्फोटक सामग्री नहीं लगी थी। इसलिए कोई नुकसान नहीं हुआ था। पाकिस्तान ने इस पर भारत के कार्यकारी राजदूत को बुलाकर विरोध दर्ज कराया था। भारत ने इस प्रकरण पर खेद जताते हुए जांच कराने की घोषणा की थी।
घटना के दो दिन बाद 11 मार्च को रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि मिसाइल गलती से चल गई और पाकिस्तान में जा गिरी। रूटीन मेंटीनेंस के दौरान तकनीकी खामियों के चलते ऐसा हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी संसद में बयान दिया। कहा कि ऐसी प्रणालियों के संचालन, रखरखाव और निगरानी की समीक्षा की जा रही है। मामले की जांच के लिए वायु सेना के एयर मार्शल की अध्यक्षता में कोर्ट आफ इन्क्वायरी बिठाई गई। जांच में पाया गया कि तीन अधिकारियों ने मानक संचालन प्रक्रियाओं का ठीक से पालन नहीं किया। इसी वजह से यह दुर्घटना हुई। इसके मद्देनजर सरकार ने तत्काल प्रभाव से 23 अगस्त को तीनों अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर जांच को बंद कर दिया है। वायु सेना ने यह नहीं बताया है कि किस रैंक के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। समझा जा रहा है कि बर्खास्त तीन अधिकारियों में एक ग्रुप कैप्टन शामिल है।
पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि ब्रह्माोस मिसाइल तीन मिनट, 46 सेकेंड तक उसकी वायु सीमा में रही थी। परमाणु क्षमता संपन्न् मिसाइल-ब्रह्माोस का विकास भारत और रूस ने मिलकर किया है। यह 300 किलोमीटर से 500 किलोमीटर तक हमला कर सकती है।










