राजधानी रायपुर में एक खिलाड़ी ने खेल के लिए जीवन समर्पित कर दिया है। वह पिछले 54 वर्षों से प्रदेशभर के बच्चों और युवाओं को फ्री में फुटबॉल की ट्रेनिंग देकर खिलाड़ी बना चुके हैं। मुस्ताक अली प्रधान फुटबॉल खेलने और सिखाने की जिद्द ऐसी की अपना घर तक छोड़ दिया। वह आज भी एक कमरे में रहकर अपनी जिंदगी बसर कर रहे हैं। उन्होंने शेरा फुटबॉल क्लब बनाकर खिलाड़ियों की जिंदगी सवार रहे हैं। अब तक 25 हजार से अधिक युवाओं को खिलाड़ी बना चुके हैं। इनके सिखाए खिलाड़ी नेशनल खेल चुके हैं। वहीं, कई खिलाड़ियों को खेल के बदौलत रेलवे, सेना और स्कूल में नौकरी पा चुके हैं। आज भी सैकड़ो बच्चे यहां फुटबॉल की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
एक शिक्षक अपने दम पर हजारों छात्रों को नई दिशा देकर उनका जीवन बदल देते हैं। कुछ ऐसी ही भूमिका निभा रहे हैं फुटबॉल और हाकी खिलाड़ी मुस्ताक अली प्रधान। उन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि 25 हजार से अधिक बच्चों को खेल की तालीम दी और यह कारवां अभी भी जारी है। मुस्ताक अली प्रधान ने बताया कि हमें बच्चों को खेल सिखा कर खुशी मिलती है। 1970 से हम फुटबॉल और हाकी खेलना शुरू किया। इसके बाद युवाओं को सिखाना शुरू किया। हमारे सिखाएं खिलाड़ी स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय, स्टेट और नेशनल लेवल खेल चुके हैं। कई खिलाड़ियों को जाब मिल चुका है। वह हमारे क्लब के साथ प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि समय-समय पर हर साल टूर्नामेंट का आयोजन भी करवाता हूं। साथ ही जरूरत के हिसाब से खेल सामाग्री भी वितरण करता हूं। उनके सिखाए खिलाड़ी और पूर्व में आरकेसी के फुटबॉल कोच ब्रेजेश सत्यपति ने बताया कि शेरा क्लब फुटबॉल का नर्सरी कहा जाता है। इसके जन्मदाता मुस्ताक अली पर प्रधान है। वह यहां 8-9 साल की उम्र में खेलने आए और अब 50 साल का हूं, फिर भी ग्राउंड छोड़ रहा हूं। नेशनल खिलाड़ी आकाश ने बताया कि सर से बहुत कुछ सीखा हूं आगे भी सीखना है।










