Google Analytics Meta Pixel Ekhabri धर्मदर्शन विशेष: क्यों रखा जाता है ऋषि पंचमी का व्रत? कैसे करें पूजा क्या है इसकी मान्यताएं, पूरी बात जाने इस पोस्ट में - Ekhabri.com

Ekhabri धर्मदर्शन विशेष: क्यों रखा जाता है ऋषि पंचमी का व्रत? कैसे करें पूजा क्या है इसकी मान्यताएं, पूरी बात जाने इस पोस्ट में



रायपुर, (पूनम ऋतु सेन)।भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है,यह त्योहार गणेश चतुर्थी के अगले दिन आता है। इस दिन सप्त ऋर्षियों का पूजन किया जाता है।

ऋषि पंचमी व्रत की मान्यताएं
ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को करने से धन-धान्य, सुख समृद्धि, संतान प्राप्ति इत्यादि कामनायें पूर्ण होती है, जो भी व्यक्ति इस व्रत का श्रद्धा अनुसार पालन करता है उसे सारे दोषों से मुक्ति मिल जाती है।यह व्रत जाने-अनजाने में हुए पापों को नष्ट करने वाला है।

व्रत संबंधी पूजा सामाग्री
इस दिन पूरे घर को शुद्ध करने के लिए गाय का गोबर या गंगाजल का उपयोग करें।व्रत रखने वाले भक्तों को इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर हल्दी से चौकोर मंडल बनाएं और उस पर सप्त ऋषियों की स्थापना कर व्रत का संकल्प लें।सप्त ऋषियों की सच्चे मन से उपासना करें। दीप-धूप जलाएं और पुष्प नैवेद्य अर्पित कर व्रत की कथा सुनें। सप्तऋषियों को मीठे पकवान का भोग लगाएं। सप्त ऋषियों की पूजा में हल्दी, चंदन, रोली, अबीर, गुलाल, मेहंदी, अक्षत, वस्त्र, फूल शामिल करना चाहिए।

व्रत के नियम
इस व्रत में एक बार रात के समय भोजन किया जाता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है।पूजन करने और कथा सुनने के बाद किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और उसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें। इस व्रत में महिलाएं जमीन से उगे हुए अन्न को ग्रहण नहीं करती हैं और इस व्रत का उद्यापन वृद्धावस्था में किया जाता है।

क्यों रखा जाता है ऋषि पंचमी का व्रत?

किसी राज्य में धर्म के प्रति गहरी आस्था रखने वाला एक ब्राह्मण परिवार रहा करता था।इसी परिवार के ब्राह्मण पति-पत्नी ने अपनी पुत्री का विवाह एक कुलीन परिवार में किया लेकिन कुछ समय बाद ही किसी कारणवश दामाद की मौत हो गई और उनकी बेटी विधवा हो गई। बेटी के विधवा होने पर दुखी होकर समाज के डर से इनका परिवार अपनी बेटी सहित गंगा नदी के किनारे कुटिया बना कर रहने लगे, कुछ समय बाद बेटी की भी तबियत खराब हो गई और उसके शरीर में कीड़े पड़ गए। इससे ब्राह्मण परिवार और भी दुखी हो गया।

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    लड़की की मां ने जब अपने पिता से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि तुम्हारी बेटी ने पूर्व जन्म में माहवारी के समय बर्तनों को छू दिया था। उसी के श्राप के कारण तुम्हारी लड़की की ऐसी दशा हुई है।


     इससे उबरने के उपाय हेतु उन्होंने ऋषि पंचमी के दिन उपवास करने के लिए कहा और पूजा विधि भी बताई। पूजा करने के बाद इस ब्राह्मण परिवार में फिर से खुशियां लौट आई और इस व्रत के असर के बाद बेटी को अगले जन्म में पूर्ण सौभाग्य प्राप्त हुआ। 

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