ईरान में हिजाब पहनने समेत अन्य प्रतिबंधों के खिलाफ भड़के आंदोलन की आग 31 प्रांतों के 80 शहरों में पहुंच गई है। हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की सख्ती भी जोरों पर है। सिर्फ गुइलान प्रांत में 700 से ज्यादा लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें 60 महिलाएं शामिल हैं।
इस बीच, राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने देश की शांति व सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। उन्होंने वर्तमान अशांति को दंगा करार दिया। कहा कि आंदोलन और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने में अंतर किए जाने की जरूरत है।
तेज होते विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान सरकार ने इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया। अधिकारियों ने कहा कि जब तक सड़कों पर शांति बहाल नहीं हो जाती, इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध जारी रहेगा।
लोगों का गुस्सा गत हफ्ते उस समय भड़क गया था, जब कुर्दिस्तान की माहसा अमीनी (22) की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। तेहरान में पुलिस ने हिजाब नहीं पहनने के आरोप में उसे हिरासत में लिया था। प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में मरने वालों की संख्या 26 हो चुकी है, जिनमें पांच पुलिसकर्मी शामिल हैं। रायटर ने एक सप्ताह के आंदोलन में मरने वालों की संख्या 41 बताई है। सैकड़ों लोग घायल हैं। लोगों ने थानों व वाहनों को आग के हवाले कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी के पोस्टर फाड़कर उन्हें आग के हवाले कर दिया। सुलेमानी की जनवरी 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत हो गई थी। उनको हीरो के रूप में देखा जाता है।
अमीनी को लेकर इंटरनेट मीडिया पर भावुक संदेश भेजे जा रहे हैं। इन संदेशों ने महिलाओं में गुस्सा भर दिया है। वे मौत की बात करती हैं, पुलिस से भिड़ने की बात करती हैं और अपनों के मारे जाने की आशंका में उनकी आंखें छलक उठती हैं। नाराज महिलाओं ने अपने बाल काटकर और बुर्का जलाकर विरोध जताया है। ईरानी कानून के अंतर्गत महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर ढीले कपड़े और हिजाब पहनना अनिवार्य है।










