रायपुर/जांजगीर-चांपा, 2 जुलाई।भारत में कुष्ठ रोग के मामलों में कमी आई है, लेकिन इससे जुड़ा सामाजिक कलंक और प्रभावित लोगों के सम्मानजनक पुनर्वास की चुनौती अब भी बनी हुई है। इलाज के बाद भी बड़ी संख्या में मरीजों को समाज की दूरी, उपेक्षा और अस्वीकार का सामना करना पड़ता है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सोठी (कात्रेनगर) स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम एक प्रभावशाली मॉडल के रूप में उभर रहा है।
करीब 60 वर्षों से संचालित यह आश्रम अब केवल उपचार केंद्र नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता का सशक्त केंद्र बन चुका है। 5 अप्रैल 1962 को समाजसेवी और स्वयं कुष्ठ रोग से प्रभावित रहे स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे द्वारा स्थापित इस संस्था का उद्देश्य शुरू से ही मरीजों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना रहा है।
*मुफ्त इलाज और आधुनिक सुविधाएं*
आश्रम में 20 बिस्तरों वाला अस्पताल है, जहां कुष्ठ रोगियों सहित जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज, दवाइयां, पट्टी, भोजन, कपड़े और रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। यहां लैब और एक्स-रे जैसी जांच सुविधाएं भी मौजूद हैं। वर्तमान में आश्रम में 75 मरीज रह रहे हैं और करीब 120 लोग उनकी सेवा में लगे हैं।
*आत्मनिर्भरता की ओर कदम*
यह आश्रम केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों को आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष ध्यान देता है। यहां खेती, बागवानी, चॉक निर्माण, कालीन बुनाई, रस्सी बनाना, सिलाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण, वेल्डिंग और वाहन चलाने जैसे कौशल सिखाए जाते हैं। साथ ही, मरीजों के बच्चों की शिक्षा की भी व्यवस्था की जाती है।
*स्वास्थ्य शिविर और सामाजिक जागरूकता*
आश्रम द्वारा समय-समय पर मुफ्त स्वास्थ्य और नेत्र जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं। अब तक 10 हजार से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए जा चुके हैं। हाल ही में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 300 से अधिक लोगों की जांच की गई और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाई गई।
*सीएम साय ने किया निरीक्षण*
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आश्रम का दौरा कर यहां की सेवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और पुनर्वास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे “मानवता, करुणा और सेवा का सच्चा तीर्थ” बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुष्ठ रोग केवल शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक पीड़ा भी है, और प्रभावित लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन देना समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आश्रम परिसर स्थित संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का निरीक्षण भी किया और कहा कि किसी व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनाना ही सबसे बड़ी सेवा है।
*मानवीय विकास का मजबूत उदाहरण*
सोठी आश्रम केवल एक संस्था नहीं, बल्कि ऐसा मॉडल है जहां स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक न्याय और गरिमा-आधारित पुनर्वास एक साथ चलते हैं। यह दर्शाता है कि किसी भी समाज की असली प्रगति उसके सबसे वंचित वर्ग को दिए गए सम्मान और अवसर से तय होती है।










