प्रेम और आस्था दोनों पर किसी का जोर नहीं यह मन जहां लग जाए वही ईश्वर नजर आता है। आस्था और प्रेम पर व्यक्ति का स्वयं नियंत्रण होता है। जहां आस्था और प्रेम लग जाता है , वहा ईश्वर के दर्शन हो जाता है।
कृष्ण और राधा का प्रेम अविरल बहती गंगा के समान शुद्ध है। परस्पर एक होते हुए भी दोनों एक-दूसरे से मिलने को तरसते हैं। एक-दूसरे से बात करने को सोचते हैं। एक-दूसरे के होकर भी मिलन की संभावना नहीं है। ऐसा जरूरी नहीं जो आप चाहें वो संभव हो जाए, यह सत्य है।










