रायपुर। विश्व के पहले शिल्पकार के रूप में पूजे जाने वाले भीगवान विश्वकर्मा की पूजा आज लोगो ने की। इस दिन को विश्वकर्मा जयंती के रूप में मनाया जाता है, कोरोना के चलते हर त्योहारों की तरह विश्वकर्मा जयंती भी सादगी से मनाई गई। लोगों में कारखानों और उद्योगो में भगवन की प्रतिमा रख कर पूजा अर्चना की।
भगवन विश्वकर्मा को यंत्रों मशीनों का अविष्कारक भी माना गया है। इस दिन उद्योगों और कारखानों में लगने वाली सभी मशीनों की पूजा की जाती है। साफ सफाई के बाद इसकी विधिवत पूजा करना चाहिए। पंडित मनोज शुक्ला बताते हैं कि उद्योग छोटा हो या फिर बड़ा इस दिन सभी मशीनों और यंत्रों की पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। सबसे पहले मशीन और यंत्रों की सफाई कर लेना चाहिए। नाम मात्र का जल आचमन कर शुद्धीकरण करने के बाद मशीनों में स्वास्तिक बना कर उसकी पूजा कर टीका करना चाहिए, फूल अर्पित करने के बाद मिठाई और फल अर्पित करना चाहिए। दीप-धूप और दीप जला कर पूजा सम्मपन करनी चाहिए।
उद्योगों के अलावा दुकानों और घरों में होने वाले यंत्रों की भी पूजा की जानी चाहिए। घरों में आप जिस भी यंत्र का उपयोग अपने काम यानि रोजी रोटी के लिए करते हैं उसकी पूजा अवश्य करनी चाहिए।

मूर्तियों की मांग में आई कमी
कोरोना के कारण पिछले साल की तुलना में इस साल मूर्तियों की बिक्री बहुत ही कम हुई। मूर्ति बेचने वालो की माने तो इस साल मूर्तियां छोटी होने के बाद भी लेने वालों की संख्या आधी से भी कम रही। इसके कारण मूर्तियां रखी रह गईं।










