बागबाहरा।महासमुंद जिले के बागबाहरा स्थित धान संग्रहण केंद्र से सत्र 2024–25 के दौरान करोड़ों रुपये के धान के गायब होने का मामला सामने आया है। आधिकारिक रिकॉर्ड में धान की प्राप्त मात्रा और प्रदाय मात्रा में बड़ा अंतर दर्शाते हुए 3.65 प्रतिशत शॉर्टेज दिखाया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ 71 लाख रुपये आंकी गई है। दस्तावेज़ों के अनुसार बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में समितियों द्वारा कुल 49,819.338 मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की गई। इसमें 46,338.019 मीट्रिक टन मोटा धान तथा 3,481.319 मीट्रिक टन सरना धान शामिल है। इसके विपरीत संग्रहण केंद्र प्रभारी द्वारा 1,821.629 मीट्रिक टन धान को अनुमत सूखत दर्शाया गया है। इस प्रकार कुल मिलाकर 3.65 प्रतिशत धान की कमी सामने आई है, जो शासन द्वारा तय मानकों से कहीं अधिक है। धान की कमी के लिए अक्सर कीट-पतंग, चूहे, पक्षी, जानवर और मौसम को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि जानकारों का कहना है कि इन कारणों से इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना संभव नहीं है। गौरतलब है कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव द्वारा 12 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि धान संग्रहण केंद्रों में 1 प्रतिशत से अधिक शॉर्टेज पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस, 1 से 2 प्रतिशत पर विभागीय जांच, और 2 प्रतिशत से अधिक शॉर्टेज की स्थिति में त्वरित निलंबन, विभागीय जांच एवं आपराधिक पाए जाने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में 3.65 प्रतिशत शॉर्टेज सामने आने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।










