यूक्रेन के जोपीरीजिया परमाणु संयंत्र परिसर में शनिवार रात और रविवार सुबह हुई गोलाबारी में बड़ा परमाणु हादसा होने से बच गया। परिसर में गिरे 12 गोलों में से कई रिएक्टर भवन के बिल्कुल नजदीक गिरे। एक गोला रेडियोएक्टिव कचरे के भंडार गृह पर जा गिरा, उससे भवन क्षतिग्रस्त हो गया लेकिन हादसा बच गया। यह जानकारी परमाणु संयंत्र में मौजूद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के विशेषज्ञ दल ने दी है।
मामले में एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी रूस और यूक्रेन को चेता चुके हैं कि संयंत्र के आसपास छिड़ा युद्ध और गोलाबारी किसी भी समय भीषण परमाणु दुर्घटना करा सकती है। उस स्थिति में आसपास कोई बचेगा नहीं। यह आग से खेलने जैसा कृत्य है। यह बात मस्तिष्क में रखनी चाहिए कि भाग्य हमेशा साथ नहीं देता है।
इस बीच रूस ने कहा है कि जपोरीजिया परमाणु संयंत्र पर हो रहे लगातार हमलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय संज्ञान ले। यूक्रेन की सेना खतरे की परवाह किए बगैर संयंत्र पर लगातार गोलाबारी कर रही है। इससे कभी भी भीषण्ा दुर्घटना हो सकती है और यूक्रेन समेत यूरोप का बड़ा हिस्सा चपेट में आ सकता है। लेकिन यूक्रेन ने हमले के लिए रूसी सेना को जिम्मेदार ठहराया है। कहा है कि यूक्रेन को बदनाम करने के लिए परमाणु संयंत्र पर रूसी सेना खुद ही गोले दाग रही है।
उल्लेखनीय है कि यूरोप के इस सबसे बड़े परमाणु संयंत्र पर युद्ध शुरू होने के कुछ हफ्ते बाद से ही रूसी सेना का कब्जा है। युद्ध से पहले इस संयंत्र से यूक्रेन की जरूरत की 20 प्रतिशत बिजली का उत्पादन होता था।
खेरसान में लड़ाई खत्म होने के बाद जपोरीजिया, डोनेस्क और लुहांस्क में एक बार फिर लड़ाई तेज हो गई है। डेनिप्रो नदी के पश्चिमी तट पर कब्जा करने के बाद यूक्रेनी सेना उसके पूर्वी तट को भी नियंत्रण में लेना चाह रही है। पूर्वी तट के क्षेत्रों पर रूसी सेना का कब्जा है और जपोरीजिया परमाणु संयंत्र भी इसी क्षेत्र में है। ताजा हमलों में इस परमाणु संयंत्र के कई भवनों को नुकसान पहुंचा है। इनमें से कई रिएक्टर भवन के बिल्कुल करीब स्थित हैं।
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