दृढ़ इच्छा शक्ति के आगे बड़ी से बड़ी परिक्षा भी छोटी हो जाती है। कुछ ऐसी ही कहानी है मृणाल गजभिये की। शौकिया तौर पर की जाने वाली साइकलिंग अब उनका जनून बन चुकी है। वे साइकिल से छत्तीसगढ़ की सैर करने के बाद अब भारत के चारों दिशाओं तक की सैर करने का सपना बुन चुके हैं। इस कड़ी में अब तक का सबसे लंबा सफर उसने राजधानी रायपुर से कच्छ (करीब 1500 किमी)तक का किया है। इतना ही नहीं 80 हजार की साइकल में चलने वाला ये शक्स अपनी यात्रा में कभी गांव वालों के साथ बासी भात खा कर वक्त बिताया तो कभी ग्रामीण इलाके में एटीएम न मिलने पर पैसों के लिए आम तक बेच डाले।
वर्ल्ड बाइसाइकिल डे पर जब हमने मृणाल से बात की तो कई रोचक किस्से समाने आ खड़े हुए। 4 साल की उम्र में पहली बार साइकल में चढ़ते वक्त मृणाल ने ये नहीं सोचा था कि ये शौक आगे चलकर उनकी पहचान बन जाएगा। जर्नलिजम करने के बाद मृणाल ने घूमने के शौक को पूरा करने के लिए एन.आई.एम का कोर्स किया। इस दौरान उन्हें पर्वता रोहण की बारीकियों के बारे में जानने को मिला। एडवेंचर से भरा ये सफर तब और सुहाना हो गया जब इसे तय करने के लिए मृणाल ने कोई बड़ी गाड़ी मोटर नहीं बल्कि साइकल का चुनाव किया। घोस्ट एसई 2000 नाम की खास साइकल के साथ उन्होंने अपना सफरनामा शुरू किया जो अब उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। इस साइकिल की खास बात ये है कि ये पूरी तरह फोल्ड भी हो जाती है और लंबे सफर के लिए ही खास तौर पर बानाई गई है। सफर के दौरान मृणाल सिर्फ जरूरत का कुछ सामान और अपने रहने के किये टेंट हाउस साथ रखते हैं। जरूरत पड़ने पर इसे रहने और सोने के लिए उपयोग करते है। इस कठिन सफर के लिए मृणाल के घर वालों ने शुरू शुरू में काफी मना किया लेकिन इस जुनून के आगे सब छोटा होता चला गया और अब परिवार वालों ने भी इसी अपना लिया है।
2016 में पहली लंबी रेस मृणाल ने छत्तीसगढ़ में शुरू की, जो कि राजधानी से बस्तर (करीब 2345 किमी) तक की थी। इस यात्रा में कुटुमसर गुफा के पास उस समय मृणाल के समाने समस्या आन खड़ी हुई जब उनके पास कैश की कमी हुई। एटीएम पास न होने के कारण मृणाल ने गिरे हुए 4 किलो आम बिन कर इकच्ठा किए और फिर गांव से निकल कर सड़क में उसे बेच कर 150 रुपए कमाए। उसी पैसे से मृणाल ने नास्ता किया। मृणाल कहते हैं कि ये सारी चीजें सफर को और भी रोचक बाना दी थीं।
बची है तीन दिशाएं
मृणाल का सपना है कि वो पूरे भारत की सैर अपनी साइकल के साथ करें। इसके लिए वे अगला सफर राजधानी से कन्याकुमारी, लद्दाख, भूटान तक शुरू करेंगे। अपनी यात्रा के दौरान मृणाल की देश के अन्य राज्यों ही नहीं बल्कि कई विदेशी र्पयटकों के साथ भी ऐसी दोस्ती हो गई जो आज तक निभा रहें हैं। इतना ही नहीं मृणाल हालीडे इन रूलर इंडिया की अंतराष्ट्रीय कंपनी ने उन्हें विदेशी पर्यटकों को भारत भ्रमण के लिए भी जॉब आफर किया है। जिसे मृणाल फ्री लेंसिंग के तौर पर करते हैं।
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