रायपुर, 23 जून 2026।छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार के साथ नागरिकों के डेटा संरक्षण और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से रायपुर में राज्य स्तरीय उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

यह कार्यशाला इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन और चिप्स (CHiPS) द्वारा आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों के 120 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।
साइबर सुरक्षा अब जनविश्वास से जुड़ा अहम विषय
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सचिव अंकित आनन्द ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता नागरिकों के विश्वास पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल सिस्टम ही इस विश्वास को मजबूत कर सकते हैं। साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि सुशासन और सेवा निरंतरता का अहम हिस्सा बन चुकी है।
राज्य के लिए तैयार हो रहा साइबर सुरक्षा रोडमैप
चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक और भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा रोडमैप तैयार कर रही है। कार्यशाला में जोखिम मूल्यांकन, डेटा सेंटर सुरक्षा, नेटवर्क सुरक्षा, सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC), जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर और साइबर जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विशेषज्ञों का जोर
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act-2023) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कानून वर्ष 2027 तक पूर्ण रूप से लागू होगा।
इसके अलावा, राष्ट्रीय और वैश्विक साइबर सुरक्षा मानकों, Trusted IT Systems और डेटा सुरक्षा के लिए प्रमाणन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
समूह चर्चाओं से मिले अहम सुझाव
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छह समूहों में विभाजित कर चर्चा कराई गई, जिसमें साइबर सुरक्षा निगरानी, नियमित ऑडिट, घटना प्रतिक्रिया तंत्र (Incident Response Mechanism) और मानव संसाधन क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।
राष्ट्रीय स्तर पर भेजी जाएंगी अनुशंसाएं
कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को संकलित कर राज्य की साइबर सुरक्षा कार्ययोजना को और प्रभावी बनाया जाएगा। चयनित सुझावों को भारत सरकार और संबंधित राष्ट्रीय संस्थाओं को भी भेजा जाएगा।
सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने सुरक्षित डिजिटल शासन और मजबूत साइबर अवसंरचना के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यशाला राज्य में साइबर सुरक्षा को नई दिशा देने और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।










