रायपुर। भारतीय जीवन और संस्कृति में दीपक केवल प्रकाश का माध्यम नहीं रहा है। यह विश्वास, आशा और अंधकार के बीच उजाले की तलाश का प्रतीक माना जाता है। मिट्टी का एक छोटा दीप भी जब किसी घर की देहरी पर जलता है, तो वह उम्मीद की एक बड़ी रोशनी जगाता है। इसी भाव के साथ 17 सितंबर की शाम 7 बजे ‘आशीर्वाद का दीया’ छत्तीसगढ़ में एक व्यापक सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनने जा रहा है।
17 सितंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस का अवसर है। पिछले वर्षों में इस दिन को सेवा, जनभागीदारी और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के संकल्प से जोड़ा गया है। ‘आशीर्वाद का दीया’ इसी भावना को एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति देता है। इसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की आकांक्षा और विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना से नागरिकों को जोड़ना है।

विकास की चर्चा अक्सर बड़ी परियोजनाओं, निवेश और आर्थिक आंकड़ों के संदर्भ में होती है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब किसी सामान्य परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने से परिवार को केवल छत नहीं मिलती, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और भविष्य के प्रति भरोसा भी मिलता है। छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण की गति ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और जीवन स्तर से जुड़े बदलावों को नई दिशा दी है।
इसी तरह उज्ज्वला योजना के माध्यम से रसोई तक पहुंची गैस, जल जीवन मिशन के जरिए घर तक पहुंचा नल का पानी, आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा और जनधन योजना के जरिए बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ना विकास के अलग-अलग आयाम हैं। इन योजनाओं का व्यापक उद्देश्य आम नागरिक के जीवन को अधिक आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना है।
विकसित भारत की यात्रा में महिला शक्ति की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ जैसी पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों, उद्यमिता और बाजार से जोड़ने के प्रयास किए गए हैं। महिलाएं कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों के माध्यम से आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ‘लखपति दीदी’ की अवधारणा महिला आर्थिक सशक्तीकरण को व्यापक लक्ष्य से जोड़ती है। महिला की आर्थिक मजबूती का असर परिवार, बच्चों की शिक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में किसान और कृषि की भूमिका केंद्रीय है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और राज्य की कृषक उन्नति योजना जैसी पहलों के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। अब कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बेहतर बाजार से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय के साथ ग्रामीण रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
गांवों का विकास सड़क, पानी, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी से भी जुड़ा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान जैसे प्रयासों का महत्व उन क्षेत्रों में और बढ़ जाता है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच चुनौतीपूर्ण रही है। सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं होती, बल्कि इसके साथ बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और नए अवसरों तक पहुंच भी बढ़ती है।
विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना में बस्तर से सरगुजा और मैदानी क्षेत्रों से वनांचलों तक समान विकास के अवसर पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। आदिवासी क्षेत्रों की संस्कृति, कला, परंपरा और वन आधारित अर्थव्यवस्था को संरक्षित रखते हुए स्थानीय रोजगार और आय के अवसर बढ़ाना विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बस्तर के हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना और पर्यटन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ना ऐसे क्षेत्र हैं, जहां विकास और सांस्कृतिक विरासत साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
दीर्घकालिक विकास की इसी सोच को ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन@2047’ से जोड़ा गया है। ‘अंजोर’ का अर्थ उजाला है और यह विजन आर्थिक रूप से मजबूत, सामाजिक रूप से समावेशी, तकनीकी रूप से सक्षम तथा प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आगे बढ़ते छत्तीसगढ़ की परिकल्पना करता है। कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, पर्यटन, कौशल, सूचना प्रौद्योगिकी, नवाचार और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों को विकास की दीर्घकालिक रणनीति से जोड़ने का प्रयास इसमें शामिल है।
भविष्य की विकास यात्रा में तकनीक की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सेवाएं, स्टार्टअप, नवाचार और नई अर्थव्यवस्था युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ के 2026-27 के बजट में अधोसंरचना, एआई, पर्यटन, स्टार्टअप और खेल जैसे क्षेत्रों से जुड़े मिशनों की परिकल्पना भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकास की दिशा को दर्शाती है।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना भी आवश्यक है। छत्तीसगढ़ की पहचान उसके जंगलों, नदियों, पहाड़ों और जल संसाधनों से जुड़ी है। जल संरक्षण, मिट्टी संरक्षण और हरियाली को विकास की प्रक्रिया से जोड़ना दीर्घकालिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। ‘मोर गांव, मोर पानी’, ‘धार अपार’ और ‘सुघ्घर बारी’ जैसे प्रयास ग्रामीण विकास को स्थानीय जल संसाधनों, पर्यावरण और आजीविका से जोड़ने की दिशा को सामने रखते हैं।
विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य केवल सरकारी योजनाओं से पूरा नहीं होगा। इसके लिए समाज की भागीदारी भी जरूरी है। किसान नई तकनीक और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाएं, युवा नए कौशल सीखें, महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में आगे बढ़ें और गांव जल एवं पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं, तो विकास का प्रभाव अधिक व्यापक और स्थायी हो सकता है।
इसी व्यापक भावना को ‘आशीर्वाद का दीया’ से जोड़ा जा रहा है। यह दीप बेहतर शिक्षा की उम्मीद, पक्के घर की सुरक्षा, रोजगार की आकांक्षा, आत्मनिर्भरता के सपने और आर्थिक सशक्तीकरण के विश्वास का प्रतीक है। यह उस आकांक्षा को भी दर्शाता है जिसमें आदिवासी और ग्रामीण समुदाय अपनी संस्कृति और पहचान को सुरक्षित रखते हुए विकास के नए अवसरों से जुड़ना चाहते हैं।
17 सितंबर की शाम 7 बजे जब घर-घर दीप जलेंगे, तो हर दीप अपने भीतर एक अलग उम्मीद लेकर रोशन होगा। किसी के लिए यह बेहतर शिक्षा का सपना होगा, किसी के लिए सुरक्षित आवास, किसी के लिए रोजगार की उम्मीद और किसी के लिए आत्मनिर्भरता की आकांक्षा। इन सभी दीपों की सामूहिक रोशनी विकास को जनभागीदारी से जोड़ने का संदेश देगी।
वर्ष 2047 अभी दूर है, लेकिन भविष्य की नींव वर्तमान में ही रखी जाती है। विकसित भारत का संकल्प ऐसी व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने की कल्पना है, जिसमें अवसरों का विस्तार हो, संसाधनों का बेहतर उपयोग हो, तकनीक जनकल्याण का माध्यम बने और विकास का लाभ समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। इसी व्यापक यात्रा में विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना भी आकार ले रही है।
इसलिए 17 सितंबर का ‘आशीर्वाद का दीया’ केवल दीप प्रज्ज्वलन का आयोजन नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति उम्मीद और विकास के संकल्प का प्रतीक है। एक छोटा दीप घर को रोशन करता है, लेकिन जब हजारों-लाखों दीप एक साथ जलते हैं तो उनकी रोशनी सामूहिक संकल्प का रूप लेती है। यही ‘आशीर्वाद का दीया’ का संदेश है—एक दीप घर में जले, एक संकल्प मन में जगे और उसकी रोशनी विकसित भारत तथा विकसित छत्तीसगढ़ की राह को उजाला दे।










