साइकिल पर पिता को लेकर गुरुग्राम से दरभंगा पहुंची ज्योति, मिला बड़ा ऑफर

भारतीय साइकिलिंग महासंघ (CFI) के निदेशक वीएन सिंह ने कोरोना वायरस के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बीच अपने पिता को साइकिल पर बैठाकर गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा पहुंची ज्योति को बड़ा ऑफर दिया है। एसोसिएशन ने उन्हें ‘क्षमतावान’ करार देते हुए कहा कि हम ज्योति को ट्रायल का मौका देंगे और अगर वह सीएफआई के मानकों पर थोड़ी भी खरी उतरती हैं तो उन्हें विशेष ट्रेनिंग और कोचिंग मुहैया कराई जाएगी।

वीएन सिंह ने कहा कि हम तो ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों की तलाश में लगे रहते हैं और अगर लड़की में इस तरह की क्षमता है तो हम उसे जरूर मौका देंगे। आगे उन्हें ट्रेनिंग और कोचिंग शिविर में डाल सकते हैं। उससे पहले हालांकि हम उनको परखेंगे। अगर वह हमारे मापदंड पर खरी उतरती हैं तो उनकी पूरी सहायता करेंगे। विदेशों से आयात की गई साइकिल पर उन्हें ट्रेनिंग कराएंगे।

बता दें कि ज्योति लॉकडाउन में अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बिठाकर लगभग 1200 किमी की दूरी आठ दिन में तय करके गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा पहुंच गई थीं। ज्योति ने रोजाना 100 से 150 किमी साइकिल चलाई।

लॉकडाउन के बाद ज्योति को ट्रायल का मौका देने के बारे में पूछे जाने पर वीएन सिंह ने कहा कि मैंने उनसे बात की थी और उन्हें बता दिया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद जब भी मौका मिलेगा वह दिल्ली आएं और इंदिरा गांधी स्टेडियम में हम उनका छोटा सा टेस्ट लेंगे। हमारे पास वाटबाइक होती है जो स्थिर बाइक है। इस पर बच्चे को बैठाकर चार-पांच मिनट का टेस्ट किया जाता है। इससे पता चल जाता है कि खिलाड़ी और उसके पैरों में कितनी क्षमता है। वह अगर इतनी दूर साइकिल चलाकर गई हैं तो निश्चित तौर पर उनमें क्षमता है।

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वीएन सिंह ने स्वीकार किया कि 15 साल की बच्ची के लिए रोजाना 100 किमी से अधिक साइकिल चलाना आसान काम नहीं है। मैं मीडिया में आई खबरों के आधार पर ही बोल रहा हूं लेकिन अगर उन्होंने सचमुच में ऐसा किया है तो वह काफी सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि ज्योति ने पिता को भी साइकिल पर बैठा रखा था और उसके पास छोटा-मोटा सामना भी रहा होगा इसलिए जो किया वह काबिलेतारीफ है। खेल की जरूरत के अनुसार वह सक्षम हैं या नहीं, इसका फैसला हम टेस्ट के बाद ही कर पाएंगे। उस टेस्ट में अगर हमारे मापदंड पर वह थोड़ी सी भी खरी उतरती हैं तो हम उसकी पूरी सहायत करेंगे और विशेष कोचिंग दी जाएगी।

पंद्रह साल की ज्योति ने बताया कि साइकिलिंग महासंघ वालों का मेरे पास फोन आया था और उन्होंने ट्रायल के बारे में बताया। अभी मैं बहुत थकी हुई हूं लेकिन लॉकडाउन के बाद अगर मुझे मौका मिलेगा तो मैं जरूर ट्रायल में हिस्सा लेना चाहूंगी। अगर मैं सफल रहती हूं तो मैं भी साइकिलिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं। तीन बहन और दो भाइयों के बीच दूसरे नंबर की संतान ज्योति ने कहा कि मैं पढ़ाई छोड़ चुकी हूं लेकिन अगर मौका मिला तो मैं दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहती हूं।

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