रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्राचीन सिद्धपीठ माँ महामाया देवी मंदिर में होने वाले प्राचीन पूजन पद्धति के अनुसार मंगलवार को सप्तमी तिथि वाली रात्रि में 12 बजे से माँ महामाया की महानिशा पूजन आरंभ हुई थी।
इस संबंध में महामाया मंदिर के पुजारी मनोज शुक्ला जी ने बताया कि आवाहित देवताओं के पूजन पश्चात
राजोपचार पूजन पद्धति अनुसार माता जी की पूजन कर श्री दुर्गा सप्तशती पाठ से पंचामृत की अखंड धारा से अभिषेक कर भव्य सिंगार किया गया। पूरे रात भर पूजन के बाद सुबह 4 बजे आरती पुष्पांजलि स्तुति के साथ यह पूजन सम्पन्न हुआ।
हवन -पूर्णाहुति
अष्टमी तिथि में आज बुधवार को सुबह से ही अठवाही चढ़ाना आरम्भ होगा , दिनभर नवरात्रि दिनचर्या के बाद रात्रि 7 बजे से हवन के लिये पूजन तथा साढ़े 7 बजे से हवन आरम्भ होगा। पूर्णाहुति साढ़े 9 बजे सम्पन्न होगा। इसके पश्चात महाआरती होगी। इसके बाद आवाहित देवी देवताओ के विसर्जन पूजन और ब्राह्मण भोजन कराया जायेगा।

फिर अर्धरात्रि में राज ज्योति सहित समस्त मनोकामना ज्योति विसर्जन के लिय गर्भगृह में मातेश्वरी के सामने शस्त्र पूजा की जायेगी। जिसमें मातेश्वरी की आठों हाथों में धारण किये जाने वाली सभी शस्त्रों (धनुष बाण, तलवार, चक्र, गदा, परिध,शूल,भुशूंडी) की विधि पूर्वक पूजन कर कुष्माण्ड बलि की पूजा होगी। शस्त्र पूजा व बलि पूजा के बाद राजज्योति की विसर्जन पूजा कर मंदिर परिसर स्थित प्राचीन बावली में ही विसर्जित किया जायेगा। ज्योति विसर्जन के बाद मातेश्वरी की ‘’वीर मुद्रा’’ में भव्य शस्त्र श्रृंगार किया जायेगा। पूरे आठों हाथों में शस्त्र धारण के साथ ही मातेश्वरी का आर्कषक श्रृंगार किया जायेगा। यह शस्त्र सिंगार पुरे वर्ष भर में मात्र 2 बार ही , नवरात्रि पर्व के ज्योति विसर्जन वाली रात को ही किया जाता है।
इस दुर्लभ छवि के दर्शन, गुरुवार को दिनभर किया जा सकता है।










