रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जन-उपयोगी बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा गठित UCC समिति ने जन-परामर्श और विचार-विमर्श की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में UCC प्रारूप समिति की उच्चस्तरीय बैठक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे संवेदनशील विषयों पर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने अपने सुझाव साझा किए।
बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या ज्योति रानी सिंह के समक्ष शिक्षाविदों ने समान नागरिक संहिता के संभावित प्रावधानों और उसके सामाजिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक विभिन्न पहलुओं पर गहन मंथन हुआ।
बैठक में प्रदेश के प्रमुख शिक्षाविदों और कुलपतियों ने UCC के मसौदे को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। समिति ने इन सुझावों को ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में प्राथमिकता के साथ शामिल करने का आश्वासन दिया है।
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU) के कुलपति प्रोफेसर विवेकानंदन ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता को लेकर विस्तृत सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने मजबूत, निष्पक्ष और न्यायसंगत मसौदा तैयार करने के लिए HNLU की ओर से तकनीकी और कानूनी सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।
बैठक में UCC के उद्देश्य और संभावित प्रभावों पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानून से जुड़े मामलों में नागरिकों के लिए समान नियम और अधिकार सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से धर्म, जाति और लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को कम करने तथा विशेष रूप से महिलाओं के लिए न्याय और समानता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला ने UCC के मसौदे को शोध आधारित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने समाजशास्त्र, मानवशास्त्र और विधि जैसे विषयों के विशेषज्ञों तथा शोधकर्ताओं के सुझावों को ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में व्यापक जमीनी सर्वे कराने और आम जनता से सीधे जन-फीडबैक लेने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि इससे प्रस्तावित कानून को प्रदेश की वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दयाल ने भी समान नागरिक संहिता को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव समिति के समक्ष रखे। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि UCC का मसौदा तैयार करते समय सामाजिक विविधता, स्थानीय परिस्थितियों और आम नागरिकों की राय को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।
# समिति ने सुझावों को प्राथमिकता देने का दिया भरोसा
शिक्षाविदों और कुलपतियों की ओर से दिए गए सुझावों की UCC समिति ने सराहना की। समिति के सदस्यों एम. के. राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह ने आश्वासन दिया कि जन-संवाद, अकादमिक शोध और विधिक संतुलन पर आधारित सुझावों को अंतिम मसौदे में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
समिति की इस कवायद से छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता के प्रस्तावित मसौदे को व्यापक जनभागीदारी और अकादमिक शोध के आधार पर तैयार करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं।










