- डॉ. दानेश्वरी संभाकर,
- उप संचालक (जनसंपर्क)
रायपुर, 20 मई 2026। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति को एक साथ जोड़ते हुए राज्य सरकार की पहल अब ग्रामीण विकास का सफल मॉडल बनती जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) के निर्माण और वितरण की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने से महिलाओं को रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता का नया अवसर मिला है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी का मौका दिया है। पहले जहां पोषण आहार का निर्माण बाहरी एजेंसियों के जरिए होता था, वहीं अब गांव की महिलाएं स्वयं इस जिम्मेदारी को संभाल रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
राज्य सरकार ने इस योजना को पहले चरण में रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया है। इन जिलों के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को उत्पादन और वितरण का जिम्मा सौंपा गया है। इससे हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है और वे अब उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
रायगढ़ जिले में राज्य का पहला रेडी-टू-ईट उत्पादन केंद्र शुरू हुआ, जो अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बना। वर्तमान में कोरबा और रायगढ़ में 10-10, सूरजपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा में 7-7, बस्तर में 6 और दंतेवाड़ा में 2 समूह इस कार्य में लगे हैं।
इस पहल की खास बात यह है कि महिलाएं अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का भी हिस्सा बन रही हैं। उन्हें मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, भंडारण और लेखा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे उनकी दक्षता और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं।
सूरजपुर जिले के संयंत्रों में महिलाएं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार कर रही हैं, जिसमें विटामिन ‘ए’, ‘डी’, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्व शामिल हैं। यह आहार बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है।
वहीं, वितरण व्यवस्था भी महिला समूहों को सौंपे जाने से लगभग 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने के कार्य में लगी हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इसे महिलाओं की आत्मनिर्भरता और पोषण सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल रोजगार सृजन कर रही है, बल्कि राज्य में कुपोषण कम करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
दरअसल, यह पहल सामाजिक बदलाव की एक सशक्त मिसाल बन चुकी है। जो महिलाएं पहले केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वे आज उत्पादन इकाइयों का संचालन कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं। नियमित आय ने उनके जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाया है।
छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित यह मॉडल “पोषण के साथ सशक्तिकरण” की अवधारणा को जमीन पर उतारते हुए एक नई विकास गाथा लिख रहा है।










